सोमवार की सुबह नोएडा के फेज-2 में हजारों कर्मचारियों का गुस्सा अचानक उग्र आंदोलन में बदल गया। सड़कें जाम हुईं, आगजनी और पत्थरबाजी हुई और पुलिस को भीड़ तितर-बितर करने के लिए आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा। हैरानी की बात यह रही कि रविवार रात को ही प्रशासन ने कर्मचारियों की अधिकतर मांगें मान ली थीं, जिनमें हर माह की 10 तारीख तक वेतन, ओवरटाइम पर दोगुनी मजदूरी और 30 नवंबर तक बोनस शामिल था।
इसके बावजूद लगभग 500 कंपनियों के कर्मचारी सड़कों पर उतर आए क्योंकि उनकी प्रमुख मांगें — न्यूनतम वेतन ₹26,000 प्रति माह, 8 घंटे की कार्यसीमा और साप्ताहिक अवकाश — अभी भी अधूरी थीं। मजदूरों का कहना है कि रोज ₹500-700 की दिहाड़ी से इस महंगाई में गुजारा नामुमकिन है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सख्त रुख अपनाते हुए उपद्रवियों की पहचान कर कार्रवाई के निर्देश दिए और औद्योगिक क्षेत्रों में शांति बहाल करने को कहा।











