बांग्लादेश में धार्मिक अल्पसंख्यकों, विशेषकर हिंदुओं, पर अत्याचार की घटनाएं बढ़ती जा रही हैं। हाल ही में, जेल में बंद हिंदू धर्मगुरु और इस्कॉन के प्रमुख चेहरों में से एक, चिन्मय कृष्ण दास के वकील, रमन रॉय पर जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में उन्हें गंभीर चोटें आईं, जिसके बाद उन्हें आईसीयू में भर्ती कराया गया। इस्कॉन कोलकाता के प्रवक्ता, राधारमण दास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर इस घटना का विवरण साझा किया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस्लामी कट्टरपंथियों ने रमन रॉय के घर पर तोड़फोड़ की और उन पर बेरहमी से हमला किया। राधारमण दास ने कहा कि रमन रॉय का एकमात्र अपराध चिन्मय कृष्ण दास का अदालत में बचाव करना था।
चिन्मय कृष्ण दास ने हाल ही में ब्रह्मचारी रंगपुर में हिंदू समुदाय पर हो रहे अत्याचारों के खिलाफ एक रैली का आयोजन किया था। इसके परिणामस्वरूप, उन्हें देशद्रोह के आरोप में गिरफ्तार किया गया और ढाका की अदालत ने उनकी जमानत याचिका 26 नवंबर को खारिज कर दी। इस मामले में मंगलवार को पुनः सुनवाई होनी थी। 25 अक्टूबर को चटगांव में एक विशाल रैली का आयोजन किया गया था, जिसमें सनातन जागरण मंच ने 8 सूत्री मांगों के साथ आवाज उठाई थी। इस रैली में भाग लेने वाले कुछ लोगों ने आजादी स्तंभ पर भगवा ध्वज फहराया, जिस पर ‘आमी सनातनी’ लिखा हुआ था।
चिन्मय कृष्ण दास और अन्य हिंदू नेताओं पर हो रहे हमलों के खिलाफ बांग्लादेश और भारत सहित विश्वभर में हिंदू समाज में आक्रोश प्रकट हो रहा है। 31 अक्टूबर को चटगांव में बीएनपी पार्टी के नेता फिरोज खान ने चिन्मय कृष्ण दास और 19 अन्य के खिलाफ राजद्रोह का मामला दर्ज किया है, जिसमें राष्ट्रीय ध्वज के अपमान के आरोप लगाए गए। इस स्थिति के विरोध में, सोमवार को नई दिल्ली में प्रदर्शन आयोजित किया गया, जिसमें प्रदर्शनकारियों ने यूएन और भारत सरकार से इस मुद्दे पर ठोस कार्रवाई की मांग की। साथ ही, दुनियाभर के इस्कॉन समुदाय में चिन्मय कृष्ण दास की गिरफ्तारी के खिलाफ कीर्तन का आयोजन किया गया। इस प्रकार, बांग्लादेश में अल्पसंख्यक हिंदुओं की सुरक्षा और उनके अधिकारों के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं।











