बिहार के उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा है कि अब एआई और आधुनिक तकनीक को गन्ना उद्योग और खेती-किसानी से जोड़ने का समय आ गया है। पटना में आयोजित गन्ना प्रौद्योगिकी सेमिनार-2026 को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि जिस बिहार के बारे में कभी कहा जाता था कि यहां उद्योग नहीं लग सकते, उसी राज्य में एनडीए सरकार ने बंद पड़ी 9 से 10 चीनी मिलों को दोबारा चालू कर दिखाया है।
उपमुख्यमंत्री ने याद दिलाया कि विधानसभा चुनाव 2025 के दौरान केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने अगले पांच वर्षों में 25 चीनी मिलें चालू करने का वादा किया था और नई सरकार बनते ही इस दिशा में काम शुरू हो गया है। तकनीक आधारित कृषि से किसानों के समग्र विकास के लिए पिछले बजट में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने का प्रावधान किया गया है और इसके लिए आवश्यक राशि भी आवंटित कर दी गई है।
सम्राट चौधरी ने कहा कि बिहार में पहले बड़ी संख्या में चीनी मिलें थीं, लेकिन पिछली सरकारों के कार्यकाल में अधिकांश बंद हो गईं। अब नीतीश कुमार के संकल्प और नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में इन्हें पुनर्जीवित किया जा रहा है। चीनी उद्योग को और बढ़ावा देने के लिए इंसेंटिव पॉलिसी 2026 का मसौदा भी तैयार किया जा रहा है।
उन्होंने महाराष्ट्र, गुजरात और हरियाणा का उदाहरण देते हुए कहा कि नगदी फसलों की खेती से वहां के किसान बेहतर आय कमा रहे हैं। सरकार का लक्ष्य है कि गन्ने जैसी नगदी फसलों को प्रोत्साहन देकर बिहार के किसानों की आय बढ़ाई जाए और राज्य के मजदूरों को बिहार में ही रोजगार के अवसर मिलें।











