भारत और फ्रांस ने रक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक समझौता किया है, जिसके तहत भारतीय नौसेना के लिए 26 राफेल-मरीन लड़ाकू विमानों की खरीद की जाएगी। यह अंतर-सरकारी समझौता (आईजीए) दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा।
डसॉल्ट एविएशन द्वारा निर्मित राफेल-मरीन समुद्री परिचालन में पूर्ण क्षमता वाला एक उन्नत लड़ाकू विमान है। समझौते के अनुसार, इन विमानों की डिलीवरी वर्ष 2030 तक पूरी हो जाएगी, और चालक दल को फ्रांस और भारत में व्यापक प्रशिक्षण प्रदान किया जाएगा।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और फ्रांस के सशस्त्र बल मंत्री सेबेस्टियन लेकॉर्नू द्वारा हस्ताक्षरित इस समझौते में प्रौद्योगिकी हस्तांतरण की महत्वपूर्ण शर्तें शामिल हैं। इसमें स्वदेशी हथियारों के एकीकरण, राफेल विमान के मुख्य भाग के उत्पादन, इंजन, सेंसर और हथियारों के लिए रखरखाव सुविधाओं की स्थापना शामिल है।
इस रणनीतिक निवेश से भारतीय अर्थव्यवस्था को महत्वपूर्ण लाभ मिलने की संभावना है। अनुमान है कि इससे हजारों सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) के लिए रोजगार के अवसर सृजित होंगे।
राफेल-मरीन विमानों के शामिल होने से भारतीय नौसेना और वायुसेना की संयुक्त परिचालन क्षमता में महत्वपूर्ण वृद्धि होगी। विशेष रूप से, विमानवाहक पोतों की रणनीतिक मारक क्षमता में काफी सुधार होगा।
यह समझौता न केवल दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग को मजबूत करेगा, बल्कि भारत की आत्मनिर्भर रक्षा नीति को भी बढ़ावा देगा।