कांग्रेस सांसद शशि थरूर के नेतृत्व में अमेरिकी नेशनल प्रेस क्लब में सर्वदलीय भारतीय संसदीय प्रतिनिधिमंडल ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के नामकरण की महत्ता पर प्रकाश डाला। प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि यह नाम गहरी सांस्कृतिक प्रतीकात्मकता से युक्त है।
थरूर ने स्पष्ट किया कि सिंदूर हिंदू परंपरा में विवाहित महिलाओं द्वारा धारण किया जाने वाला महत्वपूर्ण प्रतीक है, जिसे विवाह के समय और तत्पश्चात प्रतिदिन लगाया जाता है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकवादी हमले में 26 महिलाओं के पति मारे गए, जिससे उनके माथे का सिंदूर मिट गया। थरूर ने इस घटना की गंभीरता को इंगित करते हुए कहा, “सिंदूर का रंग लाल है, जो रक्त के समान है। यह ‘सिंदूर का बदला खून’ की अवधारणा को प्रदर्शित करता है।”
उन्होंने उल्लेख किया कि आतंकवादियों ने जानबूझकर पतियों को उनकी पत्नियों के सामने निशाना बनाया और महिलाओं को इसलिए छोड़ दिया ताकि वे इस क्रूरता की गवाह बन सकें। यह कृत्य विशेष रूप से अमानवीय था, जिसके विरुद्ध भारत की प्रतिक्रिया अत्यंत आवश्यक थी।
प्रतिनिधिमंडल का उद्देश्य पहलगाम हमले के पश्चात भारत द्वारा आतंकवाद के विरुद्ध लिए गए कदमों की वैश्विक समझ विकसित करना है। इस हमले में 25 भारतीय एवं एक नेपाली नागरिक की मृत्यु हुई थी, जिसके प्रत्युत्तर में भारतीय सशस्त्र बलों ने 7 मई को पाकिस्तान स्थित आतंकवादी ठिकानों पर ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया।
प्रतिनिधिमंडल ब्राजील की यात्रा के उपरांत अमेरिका पहुंचा है, जहां वे सीमा-पार आतंकवाद के विरुद्ध भारत के एकजुट दृष्टिकोण को अंतरराष्ट्रीय समुदाय के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं।










