वॉशिंगटन: अमेरिका और ईरान के बीच महीनों से जारी भयंकर सैन्य और परमाणु टकराव के बीच व्हाइट हाउस से एक बहुत बड़ी और निर्णायक कूटनीतिक खबर सामने आई है। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस (JD Vance) ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कड़ा भरोसा जताते हुए कहा है कि ट्रंप प्रशासन ईरान के साथ वार्ता में अपने मुख्य लक्ष्यों को हासिल करने के लिए बेहद मजबूत और ऐतिहासिक स्थिति में है। वेंस ने साफ किया कि अमेरिका का एकमात्र और सबसे बड़ा लक्ष्य ईरान को ‘परमाणु हथियार’ बनाने से हमेशा के लिए रोकना है, और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के कड़े रुख के कारण ईरान अब बातचीत की मेज पर आने के लिए पूरी तरह मजबूर हो गया है।
उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने इस संभावित समझौते को अमेरिकी जनता के लिए एक बड़ी ऐतिहासिक जीत (Home Run) बताया। उन्होंने ओबामा सरकार के समय हुए साल 2015 के ढीले परमाणु समझौते पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उस पुराने समझौते में सख्त जांच (Inspections Regime) की भारी कमी थी, जिसका फायदा उठाकर ईरान ने चोरी-छिपे अपना परमाणु कार्यक्रम चालू रखा था। लेकिन इस बार ट्रंप सरकार ‘पहले मिशन पूरा करो, फिर लंबे समय तक उसकी जांच करो’ (Accomplish and Verify) की कड़क नीति पर काम कर रही है। वेंस ने यह भी साफ किया कि इस डील को लेकर इजरायल भले ही पूरी तरह सहमत न हो, लेकिन ट्रंप प्रशासन केवल ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) के तहत अमेरिकी हितों की रक्षा के लिए यह कदम उठा रहा है।
अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि व्हाइट हाउस का यह आक्रामक और कड़ा रुख उन वैश्विक ताकतों और वामपंथी दबाव समूहों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हमेशा ईरान के परमाणु सिंडिकेट के आगे अमेरिका को कमजोर दिखाने की कोशिश करते थे। ट्रंप द्वारा लागू की गई सख्त नौसैनिक नाकेबंदी (Naval Blockade) और आर्थिक प्रतिबंधों के कारण ईरान का पूरा तेल व्यापार और अर्थव्यवस्था पूरी तरह घुटनों पर आ चुकी है, जिसके कारण अब तेहरान खुद इस विनाशकारी युद्ध को समाप्त करने के लिए गंभीर प्रस्ताव देने पर मजबूर हुआ है। राष्ट्रपति ट्रंप ने पहले ही संकेत दे दिए हैं कि अगले दो से तीन दिनों के भीतर एक अंतिम शांति समझौते की घोषणा की जा सकती है, जिसने यह साबित कर दिया है कि वैश्विक स्तर पर केवल एक मजबूत, राष्ट्रवादी और कड़ा नेतृत्व ही परमाणु माफियाओं को सीधे वश में कर सकता है।











