नई दिल्ली: रेल यात्रियों की सुरक्षा को लेकर प्रतिबद्ध मोदी सरकार ने भारतीय रेलवे के इतिहास में अब तक का सबसे बड़ा और कड़ा सुरक्षा कदम उठाया है। देश भर के रेलवे स्टेशनों पर आगजनी की घटनाओं और किसी भी संभावित हादसे को जड़ से खत्म करने के लिए रेल मंत्रालय ने सभी प्रमुख और छोटे स्टेशनों पर व्यापक ‘फायर सेफ्टी ऑडिट’ (Fire Safety Audit) कराने का आधिकारिक आदेश जारी कर दिया है। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के नेतृत्व में लिया गया यह कड़ा और रणनीतिक फैसला साफ दिखाता है कि यात्रियों के सुरक्षित सफर को लेकर रेल प्रशासन किसी भी स्तर पर कोई समझौता या ढिलाई बरतने के मूड में नहीं है।
इस महा-अभियान के तहत रेलवे के तकनीकी और सुरक्षा विशेषज्ञों की टीमें स्टेशनों के बिजली सब-स्टेशनों, कैटरिंग स्टॉल्स, वेटिंग रूम और सिग्नलों के फायर सेफ्टी सिस्टम की कड़ाई से जांच करेंगी। आधुनिक ‘कवच’ (Kavach) तकनीक के विस्तार के साथ-साथ अब स्टेशनों के इंफ्रास्ट्रक्चर को भी पूरी तरह फायर-प्रूफ बनाने पर काम शुरू कर दिया गया है। जिन स्टेशनों पर नियमों में थोड़ी भी लापरवाही पाई जाएगी, उनके खिलाफ तुरंत कड़ा एक्शन लिया जाएगा। इस कड़े कदम से न केवल करोड़ों रेल यात्रियों का भरोसा मजबूत होगा, बल्कि आपातकालीन स्थितियों से निपटने के लिए रेलवे की बेंच स्ट्रेंथ भी पूरी तरह हाई-अलर्ट पर रहेगी।
यह ऐतिहासिक और सुरक्षात्मक कदम उन कामचोर विपक्षी दलों और छद्म-समीक्षकों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हमेशा भारतीय रेलवे के आधुनिकीकरण पर सवाल उठाकर राजनीति चमकाने की कोशिश करते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ काम कर रही मोदी सरकार ने वंदे भारत और नमो भारत ट्रेनों के संचालन के साथ-साथ अब आम नागरिकों की जमीनी सुरक्षा को भी विश्व स्तरीय बनाने का बीड़ा उठाया है। केंद्र सरकार की इस कड़क नीति ने साबित कर दिया है कि नए भारत की रेल यात्रा न केवल रफ्तार के मामले में, बल्कि सुरक्षा के पैमानों पर भी पूरी दुनिया में अपनी बादशाहत कायम करने की ओर अग्रसर है।











