अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान पर संयुक्त अमेरिकी-इजराइली सैन्य कार्रवाई के बाद पहली बार सार्वजनिक रूप से बयान दिया है। वाइट हाउस में संबोधन के दौरान उन्होंने इस ऑपरेशन को सही ठहराते हुए कहा कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम अमेरिका और उसके सहयोगियों के लिए गंभीर खतरा बनता जा रहा था।
ट्रंप ने कहा कि यह कार्रवाई उस खतरे को खत्म करने का “आखिरी और सबसे बेहतर मौका” थी, जो उनके अनुसार ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम से पैदा हो रहा था। उन्होंने संकेत दिया कि यह सैन्य अभियान चार से पांच सप्ताह तक चल सकता है, हालांकि अमेरिका लंबे समय तक कार्रवाई करने में सक्षम है।
राष्ट्रपति ने आरोप लगाया कि ईरान का बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम उसके परमाणु हथियार कार्यक्रम को सुरक्षित रखने और विस्तार देने के उद्देश्य से विकसित किया जा रहा था। उनके अनुसार, यदि ईरान लंबी दूरी की मिसाइलों और परमाणु हथियारों से लैस हो जाता, तो यह मध्य-पूर्व ही नहीं बल्कि अमेरिका के लिए भी बड़ा खतरा बन सकता था।
ट्रंप ने कहा कि अमेरिकी सेना ईरान में बड़े स्तर पर अभियान चला रही है। उन्होंने दावा किया कि जून में तीन ईरानी परमाणु ठिकानों पर किए गए हमलों में उन्हें “पूरी तरह तबाह” कर दिया गया था, और चेतावनी दी गई थी कि ईरान दोबारा ऐसी गतिविधि न करे। उनके मुताबिक, ईरान ने चेतावनी को नजरअंदाज किया और अपनी कोशिशें जारी रखीं।
सीएनएन को दिए एक इंटरव्यू में ट्रंप ने कहा था कि अभियान का “बिग वेव” यानी सबसे बड़ा हमला अभी बाकी है। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिका ने अभी अपनी पूरी सैन्य क्षमता का उपयोग नहीं किया है और जरूरत पड़ने पर कार्रवाई और तेज की जाएगी।
ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान फिलहाल समाप्त नहीं होने वाला है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर इस बयान के बाद तनाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है, जबकि विशेषज्ञों का मानना है कि क्षेत्रीय स्थिरता पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ सकता है।











