खून और बारूद के बीच एक शांति की आवाज उठी है — और यह आवाज उस देश से आई है जो इस वक्त दुनिया के सबसे भीषण संघर्षों में से एक का केंद्र बना हुआ है। ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने ईद-उल-फितर और नवरोज (ईरानी नववर्ष) के अवसर पर दिए गए अपने संदेश में कहा कि ईरान मुस्लिम देशों के साथ किसी भी तरह का टकराव नहीं चाहता। उन्होंने कहा, ‘हम न संघर्ष चाहते हैं, न युद्ध। वे हमारे भाई हैं।’
सरकारी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार राष्ट्रपति ने हाल के दिनों में ईरान और कुछ अरब देशों के बीच बढ़ते तनाव पर भी बात की। उन्होंने कहा कि ईरान अपने पड़ोसी देशों के साथ सभी विवादों को बातचीत के जरिए सुलझाने के लिए तैयार है और मध्य पूर्व में मुस्लिम देशों का एक साझा सुरक्षा ढांचा बनाने का प्रस्ताव भी रखा।
परमाणु हथियारों के संवेदनशील मुद्दे पर भी उन्होंने अपनी स्थिति बिल्कुल साफ की। उन्होंने कहा कि ईरान कभी भी परमाणु हथियार बनाने की दिशा में नहीं बढ़ेगा क्योंकि देश के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई पहले ही एक धार्मिक आदेश जारी कर इस पर रोक लगा चुके हैं।
गौरतलब है कि 28 फरवरी को अमेरिका और इजरायल ने संयुक्त रूप से तेहरान समेत ईरान के कई शहरों पर हमले किए थे, जिनमें ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता, कई वरिष्ठ सैन्य कमांडर और आम नागरिकों की जान गई थी। जवाब में ईरान ने भी इजरायल और मध्य पूर्व में अमेरिकी ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमलों की झड़ी लगा दी। ऐसे माहौल में राष्ट्रपति का यह शांति संदेश राजनयिक दृष्टि से बेहद अहम माना जा रहा है।










