पश्चिम एशिया में जारी तनाव और युद्ध के बीच भारत ने एक मानवीय कदम उठाते हुए ईरानी नौसेना के युद्धपोत आईआरआईएस लवन को कोच्चि बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति दी। इस फैसले पर ईरान ने भारत का दिल से शुक्रिया अदा किया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने सोमवार को राज्यसभा में इस पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी।
श्रीलंका के पास ईरानी युद्धपोत आईआरआईएस डेना के डूबने की घटना के बाद इस इलाके में तैनात एक अन्य ईरानी नौसैनिक जहाज तकनीकी खराबी का शिकार हो गया। मुश्किल में फंसे इस जहाज ने भारत से मदद मांगी। ईरानी पक्ष ने 20 फरवरी 2026 को तीन जहाजों को भारतीय बंदरगाह पर डॉक करने की अनुमति मांगी, जो 1 मार्च 2026 को दे दी गई। आईआरआईएस लवन 4 मार्च 2026 को कोच्चि में डॉक हुआ और उसका दल अभी भारतीय नौसेना की सुविधा में है।
विदेश मंत्री ने स्वीकार किया कि मौजूदा हालात में ईरान के साथ उच्च स्तरीय संपर्क बनाए रखना चुनौतीपूर्ण रहा है, लेकिन राजनयिक चैनल सक्रिय हैं। उन्होंने बताया कि उन्होंने 20 फरवरी और 5 मार्च 2026 को ईरानी विदेश मंत्री अराघची से बातचीत की और आने वाले दिनों में यह संवाद जारी रहेगा।
जयशंकर ने पश्चिम एशिया की अस्थिरता के बीच भारत की ऊर्जा सुरक्षा पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि सरकार ने हर परिस्थिति में भारतीय उपभोक्ताओं के हितों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी है। भारत शांति और बातचीत का समर्थक है और सभी पक्षों से संयम बरतने की अपील करता है। इस क्षेत्र में रह रहे भारतीय समुदाय की सुरक्षा सरकार की प्राथमिकता है और ऊर्जा सुरक्षा व व्यापार सहित राष्ट्रीय हित हमेशा सर्वोपरि रहेंगे।
इस पूरे घटनाक्रम से यह साफ होता है कि भारत वैश्विक तनाव के बीच भी अपनी स्वतंत्र और संतुलित विदेश नीति पर कायम है — एक तरफ मानवीय सहायता का हाथ बढ़ाते हुए, दूसरी तरफ अपने राष्ट्रीय हितों की मजबूती से रक्षा करते हुए।











