वाशिंगटन/तेहरान: मध्य पूर्व (Middle East) में जारी सैन्य संघर्ष अब अपने सबसे घातक और विनाशकारी दौर में पहुंच चुका है। अमेरिकी मध्य कमान (US Central Command – CENTCOM) ने आधिकारिक पुष्टि करते हुए एलान किया है कि अमेरिकी वायुसेना और नौसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान के सैन्य ठिकानों और रणनीतिक बुनियादी ढांचे पर लगातार 11वीं रात भीषण एयर स्ट्राइक की है। अमेरिकी रक्षा विभाग पेंटागन के मुताबिक, यह कड़ा सैन्य एक्शन होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अंतर्राष्ट्रीय जलपोतों की आवाजाही को सुरक्षित करने और ईरानी खतरे को कड़ाई से खत्म करने के लिए अंजाम दिया जा रहा है।
सेंटकॉम (CENTCOM) द्वारा जारी आधिकारिक सैन्य इनपुट्स के मुताबिक, इस 11वें दौर के कड़े सैन्य ऑपरेशन में अमेरिकी फाइटर जेट्स ने ईरान के कमांड एंड कंट्रोल सेंटर्स, नौसैनिक संपत्तियों, मिसाइल हैंगर्स, ड्रोन लॉन्च फैसिलिटीज और मिलिट्री लॉजिस्टिक्स नेटवर्क के पूरे सिंडिकेट को निशाना बनाकर मलबे में तब्दील कर दिया है। अमेरिकी सेना ने दावा किया है कि पिछले कुछ महीनों में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले 30 से ज्यादा व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया था। इस कड़े प्रहार के बावजूद सेंटकॉम ने स्पष्ट किया है कि महत्वपूर्ण अंतर्राष्ट्रीय समुद्री मार्ग अभी भी खुला है और अमेरिकी बल वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित रखने के लिए तैनात हैं।
अमेरिका की इस कड़क और निरंतर सैन्य कार्रवाई ने तेहरान के सत्ताधारी खेमे और इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) में भयंकर खलबली मचा दी है। यह कड़ा प्रहार उन सैन्य विश्लेषकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है जो दावा कर रहे थे कि अमेरिकी सेना लंबे समय तक अपना आक्रामक रुख बनाए रखने में असमर्थ रहेगी। ‘नेशन First’ (Nation First) की नीति पर चल रहे पेंटागन ने वैश्विक सुरक्षा पर अपनी अटूट ‘बेंच स्ट्रेंथ’ का लोहा मनवाया है। इस 11वीं रात की एयर स्ट्राइक के बाद अमेरिका ने साफ कर दिया है कि वह क्षेत्रीय सुरक्षा और नेविगेशन की स्वतंत्रता के मोर्चे पर ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति के साथ पूरी तरह से फ्रंट-फुट पर खेल रहा है।











