भारतीयों को मिल सकती है बड़ी राहत! H-1B वीज़ा पर ट्रंप के आदेश के खिलाफ अमेरिकी संसद में बिल पेश

 

अमेरिकी संसद के निचले सदन, प्रतिनिधि सभा में राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस कार्यकारी आदेश को पलटने के लिए एक बिल पेश किया गया है, जिसमें H-1B वीज़ा शुल्क को बढ़ाकर एक लाख डॉलर कर दिया गया था। अगर यह बिल पास होता है तो भारतीय पेशेवरों को बड़ी राहत मिलेगी।

ट्रंप ने पिछले सितंबर में एक कार्यकारी आदेश पर हस्ताक्षर करते हुए H-1B वीज़ा प्रोग्राम को राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया था। इस आदेश में वीज़ा शुल्क को बढ़ाकर एक लाख डॉलर करने के साथ-साथ नियोक्ताओं पर वेतन को लेकर भी सख्त शर्तें लगाई गईं। इससे भारतीय आईटी पेशेवरों और अमेरिकी तकनीकी कंपनियों दोनों में चिंता की लहर दौड़ गई थी।

डेमोक्रेटिक सांसद बोनी वाटसन कोलमैन ने यह बिल पेश किया है। उन्होंने कहा कि ट्रंप के इस आदेश ने अमेरिकी नियोक्ताओं, विश्वविद्यालयों, अस्पतालों और शोध संस्थानों के लिए भारी मुश्किलें खड़ी कर दी हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि H-1B प्रोग्राम अमेरिकी कामगारों की जगह नहीं लेता, बल्कि यह अमेरिकी और वैश्विक प्रतिभा के बीच एक सेतु का काम करता है। बिल के सह-प्रायोजकों में न्यूयॉर्क की यवेट डी क्लार्क, फ्लोरिडा की लोइस फ्रैंकस, मैसाच्यूसेट्स के सेठ मोल्टन और जॉर्जिया के हेनरी जॉनसन शामिल हैं।

H-1B एक गैर-आप्रवासी वीज़ा है जिसके तहत अमेरिका हर साल 65,000 वीज़ा जारी करता है। उच्च डिग्री वाले आवेदकों के लिए 20,000 अतिरिक्त वीज़ा भी दिए जाते हैं। अमेरिकी नागरिकता एवं आव्रजन सेवाओं के आंकड़ों के अनुसार, 2024 में मंजूर किए गए कुल H-1B वीज़ा में अकेले भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 71 प्रतिशत थी।

अभी यह बिल प्रतिनिधि सभा में पेश हुआ है और इसे कानून बनने के लिए दोनों सदनों से पास होना ज़रूरी है। रिपब्लिकन बहुमत को देखते हुए यह राह आसान नहीं होगी, लेकिन यह बिल भारतीय समुदाय की उम्मीदों को एक नई दिशा ज़रूर देता है।

 

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