अमेरिका ने आयातित पेटेंट दवाओं पर 100 प्रतिशत तक शुल्क लगाने का ऐलान किया है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसके पीछे राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर अत्यधिक निर्भरता को कारण बताया। घोषणा में कहा गया कि दवाएं और उनसे जुड़े घटक ऐसी मात्रा और परिस्थितियों में आयात हो रहे हैं जो अमेरिकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरनाक हो सकते हैं।
यह शुल्क पेटेंट दवाओं और सक्रिय औषधीय घटकों (API) पर लागू होगा। जो कंपनियां उत्पादन अमेरिका में स्थानांतरित करने का वादा करेंगी उन्हें शुरुआत में 20 प्रतिशत का कम शुल्क देना होगा जो चार साल बाद बढ़कर 100 प्रतिशत हो जाएगा। यूरोपीय संघ, जापान, दक्षिण कोरिया और स्विट्जरलैंड से आयात पर करीब 15 प्रतिशत का कम शुल्क लगेगा।
राहत की बात यह है कि जेनेरिक दवाएं और बायोसिमिलर्स फिलहाल इस शुल्क से बाहर हैं। अनाथ दवाएं, परमाणु दवाएं और जीन थेरेपी जैसी विशेष श्रेणियां भी छूट में रहेंगी। ये शुल्क 31 जुलाई 2026 से चरणबद्ध तरीके से लागू होंगे।
इस फैसले का वैश्विक दवा व्यापार पर गहरा असर पड़ने की संभावना है। भारत और चीन दुनिया में जेनेरिक दवाओं और API के सबसे बड़े उत्पादक हैं जो अमेरिकी बाजार को बड़ी मात्रा में आपूर्ति करते हैं। हालांकि फिलहाल जेनेरिक दवाएं छूट में हैं, लेकिन भविष्य में शुल्क बढ़ने पर वैश्विक दवा आपूर्ति श्रृंखला पर व्यापक असर पड़ सकता है।











