AAP सांसद अशोक मित्तल के ठिकानों पर ED की छापेमारी, राघव चड्ढा की जगह पदभार संभालते ही बढ़ीं मुश्किलें

आम आदमी पार्टी (AAP) के राज्यसभा सांसद और उच्च सदन में पार्टी के नवनियुक्त उपनेता अशोक मित्तल के लिए आज की सुबह बड़ी कानूनी मुसीबत लेकर आई। प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम ने बुधवार तड़के पंजाब और हरियाणा में उनके करीब 10 ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की। यह कार्रवाई जालंधर स्थित उनके आवास और प्रतिष्ठित लवली प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी (LPU) सहित कई व्यावसायिक परिसरों पर की गई है। इस छापेमारी ने न केवल राजनीतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है, बल्कि ‘आप’ की आंतरिक रणनीतियों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। गौर करने वाली बात यह है कि यह कार्रवाई अशोक मित्तल को राज्यसभा में पार्टी का डिप्टी लीडर बनाए जाने के महज दो सप्ताह के भीतर हुई है। पार्टी ने अनुभवी नेता राघव चड्ढा को हटाकर हाल ही में मित्तल को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी थी।

मिली जानकारी के अनुसार, केंद्रीय जांच एजेंसी यह छापेमारी विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम (FEMA) के कथित उल्लंघन के मामले में कर रही है। छापेमारी की जद में केवल अशोक मित्तल का जालंधर आवास ही नहीं, बल्कि उनके परिवार के सदस्यों और सहयोगियों से जुड़े संस्थान भी आए हैं। इसमें पंजाब के फगवाड़ा स्थित एलपीयू कैंपस, गुरुग्राम में टेट्र कॉलेज ऑफ बिजनेस और मास्टर्स यूनियन जैसे शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं। इसके अलावा, लवली ग्रुप के अन्य उपक्रमों जैसे लवली स्वीट्स और लवली ऑटोज पर भी जांच टीमों ने दबिश दी है। सूत्रों का कहना है कि एजेंसी पिछले कुछ समय से विदेशी लेन-देन और फंडिंग के रिकॉर्ड्स की जांच कर रही थी, जिसके बाद साक्ष्यों के आधार पर यह सर्च ऑपरेशन चलाया गया है।

राजनीतिक रूप से इस घटनाक्रम को बेहद संवेदनशील माना जा रहा है। आम आदमी पार्टी ने इस कार्रवाई को पूरी तरह से “राजनीति से प्रेरित” करार दिया है। दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। भगवंत मान ने सोशल मीडिया पर पोस्ट करते हुए इसे “विपक्ष को दबाने की कोशिश” बताया और कहा कि चुनाव नजदीक आते ही भाजपा अपनी एजेंसियों को सक्रिय कर देती है। वहीं, पार्टी के अन्य नेताओं ने भी अशोक मित्तल के प्रति एकजुटता दिखाते हुए इसे राजनीतिक प्रतिशोध का हिस्सा बताया है। अशोक मित्तल, जो एक प्रसिद्ध शिक्षाविद् और सफल व्यवसायी माने जाते हैं, 2022 में राज्यसभा भेजे गए थे और संसद में वित्त संबंधी स्थायी समिति के सदस्य भी हैं।

इस छापेमारी ने राघव चड्ढा और अशोक मित्तल के बीच हुए नेतृत्व परिवर्तन की चर्चाओं को फिर से हवा दे दी है। हाल ही में ‘आप’ ने राज्यसभा सचिवालय को पत्र लिखकर राघव चड्ढा के स्थान पर मित्तल को डिप्टी लीडर नियुक्त करने का अनुरोध किया था, जिसे एक रुटीन प्रक्रिया बताया गया था। हालांकि, अब इस पद पर बैठते ही कानून के शिकंजे ने मित्तल को घेर लिया है। जांच अधिकारी वर्तमान में परिसरों से डिजिटल सबूत, बैंक खाते के विवरण और निवेश से जुड़े दस्तावेज खंगाल रहे हैं। अभी तक प्रवर्तन निदेशालय की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है, लेकिन माना जा रहा है कि पूछताछ का यह सिलसिला आने वाले दिनों में और लंबा खिंच सकता है। पंजाब की सियासत में यह मामला एक नया मोड़ लेकर आया है, जिसका असर आगामी राजनीतिक समीकरणों पर पड़ना तय है।

 

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