बंगाल के 9 जिलों में बांग्लादेश बॉर्डर पर BSF को सौंपी गई जमीन, राष्ट्रवादियों की बड़ी जीत

पश्चिम बंगाल में राष्ट्रवाद और सीमा सुरक्षा के मोर्चे पर एक बहुत बड़ा और युगांतकारी ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिला है। बांग्लादेश सीमा से होने वाली अवैध घुसपैठ, मवेशी तस्करी और असामाजिक गतिविधियों पर पूरी तरह लगाम लगाने के लिए राज्य के 9 महत्वपूर्ण सीमावर्ती जिलों में अधिग्रहित की गई 142.79 एकड़ से अधिक जमीन सीमा सुरक्षा बल (BSF) को सौंप दी गई है। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित राष्ट्रवादी सरकार ने इस सुरक्षा मिशन को ‘नेशन फर्स्ट’ (राष्ट्र प्रथम) के तहत अपनी सर्वोच्च प्राथमिकता पर रखा है। यह जमीन भारत-बांग्लादेश अंतरराष्ट्रीय सीमा के उन संवेदनशील और खुले पैच (Unfenced Stretches) पर कंटीले तारों की फेंसिंग (Barbed-Wire Fencing) और नए बॉर्डर आउटपोस्ट (BOP) के निर्माण के लिए दी गई है, जिन्हें पूर्ववर्ती तृणमूल कांग्रेस (TMC) सरकार ने अपने वोट बैंक और तुष्टिकरण की राजनीति के कारण दशकों से खुला छोड़ रखा था।

इस बड़े फैसले के साथ ही राज्य सरकार ने सीमावर्ती सुरक्षा को चाक-चौबंद करने के लिए केंद्र की ‘स्मार्ट बॉर्डर इनिशिएटिव’ प्रणाली को भी मंजूरी दे दी है। इस योजना के तहत अब सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) से लेकर मालदा और मुर्शिदाबाद तक के सभी अति-संवेदनशील नदीय और जमीनी क्षेत्रों में आधुनिक तकनीक, ड्रोन, नाइट-विज़न रडार और इलेक्ट्रोमैग्नेटिक बैरियर्स लगाए जाएंगे। राष्ट्रवादी विचारकों और रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि घुसपैठियों को खुली छूट देने वाले पुराने तंत्र को ध्वस्त करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में “डिटेक्ट, डिलीट और डिपोर्ट” (पहचान करो, नाम हटाओ और वापस भेजो) की बेहद सख्त नीति लागू की है। इसके तहत मालदा के इंग्लिश बाजार और मुर्शिदाबाद के लालगोला में पहले ही डिटेंशन होल्डिंग सेंटर शुरू कर दिए गए हैं, जहाँ अवैध रूप से रह रहे संदिग्ध बांग्लादेशी नागरिकों को पकड़कर, उनकी पहचान सत्यापित करने के बाद सीधे बीएसएफ के जरिए उनके देश डिपोर्ट किया जा रहा है। सरकार के इस आक्रामक रुख से घुसपैठियों के संरक्षकों में हड़कंप मच गया है।

सोशल मीडिया और सर्च इंजनों पर आज ‘Bengal Handed Over Land to BSF’ और ‘Suvendu Adhikari Detect Delete Deport Policy’ सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है, क्योंकि करोड़ों देशभक्त इसे भारत की आंतरिक सुरक्षा की एक महान विजय मान रहे हैं। कलकत्ता हाईकोर्ट के सख्त आदेशों के बाद भी पूर्व की सेक्युलर सरकार इस राष्ट्रीय महत्व के कार्य में लगातार रोड़े अटका रही थी, लेकिन नई व्यवस्था ने आते ही कुछ ही दिनों के भीतर जमीन का हस्तांतरण पूरा कर वामपंथी और छद्म-सेक्युलर नैरेटिव को गहरी शिकस्त दी है। इस फेंसिंग कार्य के पूरा होते ही सीमा पार से होने वाली हथियारों की तस्करी, ड्रग्स नेटवर्क और आईएसआई (ISI) समर्थित भारत विरोधी गतिविधियों की कमर पूरी तरह टूट जाएगी और सीमा पर रहने वाले भारतीय नागरिकों को एक सुरक्षित और आत्मनिर्भर वातावरण मिल सकेगा।

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