ब्रिक्स महिला कार्य समूह की पहली बैठक: ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ को वैश्विक प्राथमिकता बनाने पर बनी सहमति

ब्रिक्स (BRICS) देशों के संगठन ने अपनी प्राथमिकताओं में एक बड़ा रणनीतिक बदलाव करते हुए ‘ब्रिक्स महिला कार्य समूह’ (Women’s Working Group) की पहली औपचारिक बैठक का आयोजन किया है। इस ऐतिहासिक बैठक का मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के भीतर न केवल महिलाओं के अधिकारों की रक्षा करना है, बल्कि उन्हें आर्थिक विकास की मुख्यधारा में लाकर ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ (Women-led Development) के मॉडल को वैश्विक स्तर पर स्थापित करना है। बैठक के दौरान भारत, रूस, चीन, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका के साथ-साथ नए सदस्य देशों के प्रतिनिधियों ने इस बात पर जोर दिया कि अब समय केवल महिलाओं के कल्याण तक सीमित रहने का नहीं है, बल्कि उन्हें नीति-निर्धारण और बड़े आर्थिक निर्णयों में नेतृत्वकारी भूमिका प्रदान करने का है। इस दौरान सदस्य देशों ने साझा सहमति जताई कि महिलाओं की भागीदारी के बिना ब्रिक्स देशों की अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाना संभव नहीं है।

बैठक में विशेष रूप से तीन प्रमुख स्तंभों—आर्थिक सशक्तिकरण, डिजिटल साक्षरता और सामाजिक न्याय—पर ध्यान केंद्रित किया गया। प्रतिनिधियों ने चर्चा की कि किस प्रकार ब्रिक्स देशों में महिला उद्यमियों के लिए वित्त तक पहुंच आसान बनाई जा सकती है और उनके द्वारा संचालित सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (MSMEs) को वैश्विक बाजार से जोड़ा जा सकता है। भारत की ओर से ‘महिला नेतृत्व वाले विकास’ के विजन को मजबूती से रखा गया, जो हाल के वर्षों में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भारत की विदेश नीति का एक अहम हिस्सा रहा है। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि डिजिटल अर्थव्यवस्था के इस युग में महिलाओं को तकनीकी कौशल प्रदान करना और स्टेम (STEM) क्षेत्रों में उनकी भागीदारी बढ़ाना इस कार्य समूह की सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं को ई-कॉमर्स और आधुनिक कृषि तकनीकों से जोड़ने के लिए एक साझा ढांचा तैयार करने पर भी विचार-विमर्श किया गया।

इस बैठक के निष्कर्षों को आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के मुख्य एजेंडे में शामिल किया जाएगा, जो संगठन के भविष्य के रोडमैप को तय करेगा। अंतरराष्ट्रीय विश्लेषकों का मानना है कि ब्रिक्स जैसे प्रभावशाली मंच पर महिलाओं के लिए एक समर्पित कार्य समूह का गठन यह दर्शाता है कि उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं अब सामाजिक समावेश को आर्थिक प्रगति के साथ जोड़कर देख रही हैं। बैठक के अंत में एक संयुक्त वक्तव्य की रूपरेखा तैयार की गई, जिसमें कार्यस्थल पर लैंगिक समानता सुनिश्चित करने और नेतृत्व के पदों पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व को अनिवार्य रूप से बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई गई। यह पहल न केवल सदस्य देशों के बीच आपसी सहयोग को नया आयाम देगी, बल्कि वैश्विक स्तर पर महिलाओं की भूमिका को लेकर एक सकारात्मक संदेश भी साझा करेगी।

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