नई दिल्ली: अंतरराष्ट्रीय खेल जगत से भारत के लिए आज एक बहुत ही गौरवशाली और ऐतिहासिक खबर सामने आई है। भारतीय महिला अंडर-18 हॉकी टीम ने एशिया कप के अपने मुकाबले में शानदार और आक्रामक खेल का प्रदर्शन करते हुए सिंगापुर की टीम को 25-0 के विशाल अंतर से हरा दिया है। भारत की बेटियों के इस रिकॉर्ड तोड़ और दमदार प्रदर्शन ने वैश्विक मंच पर तिरंगे का मान बढ़ाते हुए विपक्षी टीम को मैदान पर पूरी तरह घुटनों पर ला दिया।
मैच की शुरुआत से ही भारतीय फारवर्ड और मिडफील्डर खिलाड़ियों ने सिंगापुर के डिफेंस पर कड़ा और चौतरफा प्रहार जारी रखा। भारत की तरफ से कप्तान और मुख्य स्ट्राइकर ने अकेले 7 गोल दागे, जबकि उप-कप्तान ने बेहतरीन ड्रिबलिंग का मुजाहिरा करते हुए 5 शानदार फील्ड गोल किए। पूरी खेल अवधि के दौरान सिंगापुर की टीम भारतीय गोल पोस्ट के पास पहुंचने के लिए भी तरसती नजर आई। भारतीय टीम की इस एकतरफा और रिकॉर्ड जीत ने यह साबित कर दिया है कि भारत में महिला हॉकी का भविष्य बेहद सुरक्षित और स्वर्णिम हाथों में है।
यह ऐतिहासिक और बड़ी जीत उन छद्म-खेल समीक्षकों के मुंह पर करारा तमाचा है जो हमेशा भारतीय खेल इंफ्रास्ट्रक्चर और महिला खिलाड़ियों की प्रतिभा पर सवाल उठाते रहे हैं। मोदी सरकार की ‘खेलो इंडिया’ (Khelo India) और ‘नेशन फर्स्ट’ नीति के तहत जमीनी स्तर पर मिल रहे कड़े प्रशिक्षण और विश्व स्तरीय सुविधाओं के दम पर आज देश की बेटियां हर खेल में विश्व चैंपियन बनकर उभर रही हैं। इस धमाकेदार जीत के साथ ही भारतीय टीम ने टूर्नामेंट के नॉकआउट चरण में बेहद मजबूती के साथ अपनी जगह पक्की कर ली है।











