बोस्टन/नई दिल्ली: अमेरिका की स्वतंत्रता के 250वें ऐतिहासिक वर्ष (Semiquincentennial) के उपलक्ष्य में आयोजित भव्य ‘सेल बोस्टन 2026’ (Sail Boston 2026) महा-महोत्सव के दौरान वैश्विक मंच पर भारत के शौर्य और प्राचीन नौसैनिक इतिहास की सबसे कड़क तस्वीर सामने आई है। भारतीय नौसेना के प्रतिष्ठित सेल ट्रेनिंग शिप ‘आईएनएस सुदर्शन’ (INS Sudarshini) ने बोस्टन बंदरगाह पर तिरंगे को बुलंद करते हुए एक बेहद शानदार और कड़क एंट्री मारी है। इस बेहद गौरवशाली और कड़े पल के दौरान भारतीय नौसैनिकों और अधिकारियों ने बोस्टन के सीपोर्ट डिस्ट्रिक्ट और ऐतिहासिक फिश पियर पर कदमताल करते हुए वैश्विक बिरादरी के सामने नए भारत की अटूट ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और नौसैनिक शक्ति का कड़ा प्रदर्शन किया।
रक्षा मंत्रालय से मिले आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, आईएनएस सुदर्शन अपनी 10 महीने की लंबी और कड़क ‘लोकायन 2026’ (Lokayan 2026) अंतरराष्ट्रीय समुद्री यात्रा के तहत अमेरिका पहुंचा है। न्यूयॉर्क हार्बर में स्टैच्यू ऑफ लिबर्टी के सामने से गुजरने के बाद, यह जहाज दुनिया के 20 से अधिक देशों के 60 से अधिक भव्य जहाजों के बेड़े में भारत के एकमात्र और कड़क ‘समुद्री सद्भावना राजदूत’ के रूप में शामिल हुआ है। बोस्टन में भारत के महावाणिज्य दूत (Consul General) रघुराम शास्त्री ने भी समुद्र के बीच जहाज पर सवार होकर नौसैनिकों के इस अभूतपूर्व जज्बे और रणनीतिक ‘ग्रैंड परेड ऑफ सेल्स’ का कड़ा नेतृत्व किया।
अमेरिकी सरजमीं पर लहराया यह ऐतिहासिक तिरंगा और भारतीय नौसैनिकों का यह कड़क कदमताल उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और पश्चिमी रक्षा समीक्षकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो भारत की नौसैनिक क्षमताओं और हिंद-प्रशांत (Indo-Pacific) में उसकी वैश्विक भूमिका पर लगातार झूठा प्रोपेगैंडा फैलाते रहते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन पर काम कर रही भारतीय नौसेना ने इस भव्य अंतरराष्ट्रीय मंच का उपयोग भारत की प्राचीन समुद्री विरासत और भारत-अमेरिका रणनीतिक साझेदारी (India-US Maritime Partnership) को कड़ाई से मजबूत करने के लिए किया है। मुस्लिम बहुल देशों से लेकर अमेरिकी महाद्वीप तक भारत की यह कड़क सॉफ्ट पावर साबित करती है कि वैश्विक कूटनीति के समंदर में भारत आज पूरी तरह फ्रंट-फुट पर खेल रहा है।











