फीफा वर्ल्ड कप के लिए ईरानी टीम को मिला वीज़ा

वॉशिंगटन: फ़ीफ़ा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत से ठीक 10 दिन पहले एक बड़ा कूटनीतिक और खेल गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया है। दोनों देशों के बीच जारी भारी सैन्य और राजनीतिक तनाव के बावजूद, अमेरिकी प्रशासन (व्हाइट हाउस) ने ईरान की राष्ट्रीय फ़ुटबॉल टीम को वर्ल्ड कप मैचों में भाग लेने के लिए आधिकारिक तौर पर एंट्री वीज़ा जारी कर दिया है। अमेरिका का यह फैसला उन कट्टरपंथी और ईरान-विरोधी अमेरिकी लॉबियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो खेल के मैदान पर भी अपनी ओछी राजनीति चमकाने के लिए ईरान को बैन करने की मांग कर रही थीं।

तुर्की के अंकारा में स्थित अमेरिकी दूतावास ने फ़ीफ़ा (FIFA) के कड़े नियमों और अंतरराष्ट्रीय खेल भावना का सम्मान करते हुए इस वीज़ा प्रक्रिया को युद्ध स्तर पर पूरा किया। दरअसल, अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने सख्त चेतावनी दी थी कि ईरान की ‘इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स’ (IRGC) से जुड़े किसी भी अधिकारी को वीज़ा नहीं दिया जाएगा, जिसके कारण कई खिलाड़ियों के अनिवार्य सैन्य सेवा रिकॉर्ड के चलते वीज़ा में भारी देरी हो रही थी। लेकिन फ़ीफ़ा के कड़े हस्तक्षेप के बाद, अमेरिका को घुटने टेकने पड़े और खिलाड़ियों तथा मुख्य कोचिंग स्टाफ को वीज़ा जारी करना पड़ा, हालांकि कुछ प्रशासनिक अधिकारियों को अभी भी क्लीयरेंस नहीं मिली है।

इस वीज़ा विवाद और सुरक्षा चिंताओं के कारण ईरान ने एक बेहद मजबूत रणनीतिक कदम उठाते हुए अमेरिका के एरिज़ोना में बने अपने मूल बेस कैंप को अंतिम समय में रद्द कर दिया। ईरान की टीम अब अमेरिका में ज्यादा समय बिताने के बजाय पड़ोसी देश मैक्सिको के तिजुआना (Tijuana) शहर में अपना नया वर्ल्ड कप मुख्यालय बनाएगी। ग्रुप-जी (Group G) में शामिल ईरान अपना पहला मुकाबला 15 जून को लॉस एंजिल्स में न्यूजीलैंड के खिलाफ खेलेगा। इसके बाद उसे बेल्जियम और मिस्र से भी अमेरिका की धरती पर ही भिड़ना है। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के दौर में भी खेल ने यह साबित कर दिया है कि वह राजनीतिक दुश्मनी और सीमाओं के बंधनों से कहीं ऊपर है।

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