वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की अपनी कड़क और आक्रामक नीति को दोहराते हुए वैश्विक व्यापार जगत में एक बार फिर भयंकर हड़कंप मचा दिया है। ट्रंप ने उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के सबसे बड़े मुक्त व्यापार समझौते USMCA (यूनाइटेड स्टेट्स-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट) के भविष्य पर गहरी अनिश्चितता के बादल मंडरा दिए हैं। एक प्रमुख बिजनेस समिट में दिए अपने कड़े बयान में ट्रंप ने साफ-साफ शब्दों में कहा, “मुझे नहीं पता कि मैं इस समझौते को रिन्यू (नवीनीकृत) करूंगा या नहीं।” ट्रंप के इस एक बयान ने मेक्सिको और कामनाडा की सरकारों के साथ-साथ पूरी दुनिया के बाजारों में खलबली मचा दी है।
साल 2026 में इस ऐतिहासिक समझौते की अनिवार्य समीक्षा (Mandatory Review) होनी है, और ट्रंप की यह कड़क चेतावनी सीधे तौर पर मेक्सिको और कनाडा पर दबाव बनाने की एक सोची-समझी रणनीतिक चाल मानी जा रही है। ट्रंप ने पहले ही साफ कर दिया है कि अगर मेक्सिको ने अपनी सीमाओं से अवैध घुसपैठ और ड्रग्स की तस्करी को पूरी कड़ाई से नहीं रोका, तो अमेरिका इस समझौते से पूरी तरह बाहर निकल सकता है। ट्रंप का यह रुख उन वैश्विक कम्युनिस्ट और वामपंथी अर्थशास्त्रियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो यह सोचते थे कि अमेरिका अपने राष्ट्रीय हितों और डोमेस्टिक मैन्युवार्क्चरिंग को दांव पर लगाकर इन देशों को मुफ्त की छूट देता रहेगा।
‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के इस दौर में ट्रंप प्रशासन ने यह स्पष्ट संदेश दे दिया है कि अमेरिका अब किसी भी देश के साथ ऐसा कोई समझौता नहीं रखेगा जिससे अमेरिकी कामगारों और उद्योगों को नुकसान पहुंचता हो। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप इस अनिश्चितता का उपयोग कनाडा और मेक्सिको से अधिक व्यापारिक रियायतें वसूलने के लिए कर रहे हैं। यदि यह समझौता रद्द या संशोधित होता है, तो वैश्विक ऑटोमोबाइल सेक्टर और सप्लाई चेन में भारी उथल-पुथल मचनी तय है। ट्रंप के इस आक्रामक दांव ने साबित कर दिया है कि नए वैश्विक व्यापारिक परिदृश्य में केवल वही देश टिक पाएंगे जो अपनी सीमाओं और व्यापारिक नीतियों पर कड़ा और राष्ट्रवादी रुख बनाए रखेंगे।











