काठमांडू/नई दिल्ली: भारत और नेपाल के सदियों पुराने कूटनीतिक और व्यापारिक संबंधों को पटरी से उतारने की साज़िश रचने वाले तत्वों को काठमांडू से एक करारा जवाब मिला है। नेपाल सरकार ने उन तमाम मीडिया रिपोर्टों और अफ़वाहों को सिरे से खारिज कर दिया है, जिनमें दावा किया जा रहा था कि नेपाल ने भारत से आने वाले रसीले आमों (Indian Mangoes) के आयात पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया है। नेपाल के कृषि और पशुधन विकास मंत्रालय ने एक कड़ा और स्पष्ट बयान जारी करते हुए साफ किया है कि भारतीय आमों के आयात पर न तो कोई रोक लगाई गई है और न ही भविष्य में ऐसा कोई इरादा है।
नेपाल सरकार के अधिकारियों के अनुसार, सीमा पर केवल नियमित ‘फाइटोसैनिटरी’ (Phytosanitary) और कीटनाशक जांच (Pesticide Testing) की कड़क प्रक्रिया अपनाई जा रही है, जो अंतरराष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों के तहत पूरी तरह सामान्य है। यह कड़ा स्पष्टीकरण उन चीन-परस्त कूटनीतिक और वामपंथी सिंडिकेट्स के मुंह पर करारा तमाचा है, जो सोशल मीडिया और स्थानीय मीडिया में झूठी अफ़वाहें फैलाकर दोनों मित्र देशों के बीच ‘ट्रेड वॉर’ का माहौल बनाने की ओछी कोशिश कर रहे थे। भारतीय आम न केवल नेपाल की जनता की पहली पसंद हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच कृषि व्यापार की रीढ़ भी माने जाते हैं।
मोदी सरकार की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ (Neighborhood First) और मजबूत आर्थिक नीतियों के कारण आज नेपाल अपनी खाद्यान्न और फल सुरक्षा के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर है। इस कड़े और आधिकारिक बयान के बाद सीमा पर ट्रकों की आवाजाही सामान्य रूप से जारी है और भारतीय व्यापारियों को बड़ी राहत मिली है। काठमांडू के इस रुख ने साफ कर दिया है कि ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के इस दौर में भी भारत और नेपाल के बीच की रोटी-बेटी और व्यापार की कूटनीतिक दीवार इतनी मजबूत है कि कोई भी विदेशी बहकावा या झूठा प्रोपेगैंडा इसे हिला नहीं सकता।











