मुजफ्फराबाद/नई दिल्ली: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में इस्लामाबाद के क्रूर शासन और आर्थिक शोषण के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा और ऐतिहासिक जन-विद्रोह भड़क उठा है। ‘जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी’ (JAAC) के बैनर तले मुजफ्फराबाद, रावलकोट और मीरपुर समेत पूरे क्षेत्र में लाखों नागरिक सड़कों पर उतर आए हैं। आटे-बिजली की किल्लत, बुनियादी अधिकारों के हनन और चुनावों में धांधली की साजिश के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे निहत्थे नागरिकों पर पाकिस्तानी रेंजर्स और पुलिस ने भयंकर और खूनी क्रैकडाउन किया है। पाकिस्तानी सुरक्षा बलों की इस अंधाधुंध गोलीबारी और बर्बरता में 30 से अधिक स्थानीय नागरिकों की मौत हो गई है और सैकड़ों लोग गंभीर रूप से घायल हैं, जिसने पूरे क्षेत्र को युद्ध के मैदान में तब्दील कर दिया है।
पाकिस्तानी हुकूमत ने इस भीषण जनाक्रोश को दबाने के लिए पूरे पीओके में मोबाइल और इंटरनेट सेवाओं को पूरी तरह ठप (Internet Blackout) कर दिया है और धारा 144 लागू कर सेना को खुली छूट दे दी है। इसके बावजूद, रावलकोट के कायदे-आजम स्टेडियम और सड़कों पर हजारों प्रदर्शनकारियों ने पाकिस्तानी कब्जे के खिलाफ कड़े और आक्रामक नारे लगाए। इस गंभीर मानवाधिकार उल्लंघन पर भारत सरकार ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ा और स्पष्ट रुख अपनाया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने नई दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस कर पाकिस्तानी सेना की इस भयानक क्रूरता की कड़े शब्दों में निंदा की और वैश्विक समुदाय से अपील की कि वे निर्दोष कश्मीरियों पर हो रहे इस अत्याचार के लिए पाकिस्तान को सीधे तौर पर जवाबदेह ठहराएं।
भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने साफ किया कि अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए पाकिस्तान लगातार झूठे वीडियो और फेक न्यूज का प्रोपेगैंडा फैला रहा है, जो अब पूरी दुनिया के सामने बेनकाब हो चुका है। एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty International) जैसी वैश्विक संस्थाओं ने भी पाकिस्तान द्वारा नागरिक अधिकारों को कुचलने के लिए लगाए गए ‘एंटी-टेरर कानून’ की कड़े शब्दों में थू-थू की है। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प के साथ खड़ा नया भारत अपने इस अभिन्न हिस्से के नागरिकों पर हो रहे जुल्म को कतई बर्दाश्त नहीं करेगा। कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पीओके में भड़की विद्रोह की यह आग उन वामपंथी टूलकिटधारियों के मुंह पर भी करारा तमाचा है जो हमेशा पाकिस्तान का झूठा राग अलापते थे; आज पीओके की त्रस्त जनता खुद चीख-चीख कर पाकिस्तान से आजादी और भारत के साथ आने की मांग कर रही है।











