विएना: अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के प्रमुख सदस्य देशों—विशेष रूप से ब्रिटेन, फ्रांस, जर्मनी (E3) और संयुक्त राज्य अमेरिका—ने ईरान के खिलाफ एक कड़ा औपचारिक प्रस्ताव तैयार किया है, जिसके तहत तेहरान के परमाणु मामले को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में भेजने की सिफारिश की गई है। यह कदम कई अघोषित स्थलों पर पाए गए यूरेनियम के अंशों और परमाणु निगरानी तंत्र पर ईरान द्वारा एजेंसी के साथ पूर्ण सहयोग न करने की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
राजनयिक सूत्रों के अनुसार, मसौदा प्रस्ताव में इस बात पर गहरी चिंता व्यक्त की गई है कि ईरान ने वर्षों की जांच के बावजूद अघोषित ठिकानों पर परमाणु सामग्री की मौजूदगी को लेकर तकनीकी रूप से विश्वसनीय स्पष्टीकरण नहीं दिया है। इसके अलावा, ईरान द्वारा उन्नत सेंट्रीफ्यूज के माध्यम से यूरेनियम को उच्च संवर्धन स्तर (60 प्रतिशत तक) पर ले जाने और आईएईए के कई अनुभवी निरीक्षकों की मान्यता रद्द करने जैसे कदमों को परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के तहत सुरक्षा उपायों के दायित्वों का खुला उल्लंघन बताया गया है।
प्रस्ताव में ईरान से आईएईए के महानिदेशक राफेल ग्रोसी और एजेंसी के तकनीकी दलों को सभी संदिग्ध स्थलों पर बिना किसी शर्त के तत्काल पहुंच प्रदान करने की मांग की गई है। विश्लेषकों का मानना है कि यदि आईएईए बोर्ड ऑफ गवर्नर्स द्वारा इस प्रस्ताव को पारित कर दिया जाता है और मामला सुरक्षा परिषद को भेजा जाता है, तो ईरान पर पूर्व में हटाए गए संयुक्त राष्ट्र प्रतिबंधों की ‘स्नैपबैक’ (Snapback) प्रक्रिया के तहत पुनः बहाली का रास्ता खुल सकता है, जिससे पश्चिम एशिया में कूटनीतिक तनाव और गहराने की आशंका है।











