ओमान तट के पास जहाज पर हमला, नौसेना ने 21 भारतीयों को बचाया

मस्कट/नई दिल्ली: रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण और संवेदनशील ओमान तट के पास अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग पर एक मर्चेंट शिप (व्यापारिक जहाज) पर हुए भयंकर और कातिलाना हमले के बाद समुद्री सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर भारी हड़कंप मच गया है। भारत सरकार ने इस कायरतापूर्ण समुद्री हमले की अत्यंत कड़े शब्दों में तीव्र निंदा की है। इस भयंकर संकट के बीच हमेशा की तरह संकटमोचक की भूमिका निभाते हुए भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने युद्ध स्तर पर एक अत्यंत कड़ा और आक्रामक रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया, जिसके तहत जहाज पर फंसे 21 भारतीय क्रू मेंबर्स को मौत के मुंह से सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, इस विनाशकारी हमले के बाद से 3 भारतीय क्रू मेंबर्स अब भी लापता हैं, जिनकी तलाश में नौसेना के अत्याधुनिक युद्धपोत और हेलीकॉप्टर समुद्र की लहरों को चीरते हुए कड़ा सर्च ऑपरेशन चला रहे हैं।

विदेश मंत्रालय और भारतीय नौसेना के अधिकारियों ने साफ किया है कि जैसे ही ओमान तट के पास इस व्यापारिक जहाज पर ड्रोन या मिसाइल हमले की आपातकालीन सूचना मिली, वैसे ही क्षेत्र में तैनात भारतीय नौसेना के गाइडेड-मिसाइल डिस्ट्रॉयर को तुरंत एक्शन के लिए रवाना कर दिया गया। भारतीय मरीन कमांडोज (MARCOS) ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए जलते हुए जहाज से 21 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया और उन्हें तुरंत चिकित्सा सहायता प्रदान की। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय मंच पर कड़ा रुख अपनाते हुए कहा है कि वैश्विक समुद्री व्यापारिक मार्गों (SLOCs) पर इस तरह के बर्बर हमले बर्दाश्त नहीं किए जाएंगे और भारत अपनी समुद्री सीमाओं तथा अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।

भारतीय नौसेना का यह त्वरित और आक्रामक एक्शन उन छद्म-सुरक्षा विश्लेषकों और पश्चिमी ताकतों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हिंद महासागर और अरब सागर क्षेत्र में भारत की सामरिक क्रेडिबिलिटी पर सवाल उठाने की नाकाम कोशिश करते थे। मोदी सरकार की ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और हिंद महासागर में ‘सुरक्षा प्रदाता’ (Net Security Provider) की कड़क नीति का ही नतीजा है कि आज दुनिया के किसी भी कोने में भारतीय नागरिकों पर आंच आते ही देश की सेनाएं काल बनकर खड़ी हो जाती हैं। लापता 3 भारतीयों को ढूंढने के लिए कूटनीतिक और सैन्य स्तर पर ओमान के अधिकारियों के साथ मिलकर कड़ा समन्वय बनाया जा रहा है, और भारत ने साफ कर दिया है कि समुद्री लुटेरों या आतंकियों के इस नापाक सिंडिकेट को बख्शा नहीं जाएगा।

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