नई दिल्ली: केंद्र सरकार देश में हरित ऊर्जा और कृषि क्षेत्र के दोहरे विकास के लिए ‘एग्रीवोल्टाइक’ प्रणाली को बढ़ावा देने हेतु नए वित्तीय प्रोत्साहनों पर विचार कर रही है। इस आधुनिक तकनीक के तहत एक ही कृषि भूमि पर ऊपर सोलर पैनल लगाकर सौर ऊर्जा का उत्पादन किया जाता है और नीचे फसलों की खेती जारी रखी जाती है।
ऊर्जा विशेषज्ञों के अनुसार, पारंपरिक सोलर प्लांट्स की तुलना में एग्रीवोल्टाइक संरचनाओं की स्थापना लागत लगभग 25 से 30 प्रतिशत अधिक होती है। किसानों और ऊर्जा विकासकर्ताओं पर पड़ने वाले इस अतिरिक्त आर्थिक भार को कम करने के लिए सरकार पीएम-कुसुम योजना के तहत अतिरिक्त सब्सिडी देने या इसके लिए एक विशेष नीतिगत ढांचा तैयार करने की योजना बना रही है।
इस दूरगामी पहल से न केवल देश के नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्यों को तेजी से हासिल करने में मदद मिलेगी, बल्कि किसानों को अपनी ही जमीन से दोहरा आर्थिक लाभ भी मिलेगा। साथ ही, कृषि भूमि के औद्योगिक उपयोग पर होने वाले भूमि विवादों को समाप्त कर खाद्य और ऊर्जा सुरक्षा के बीच संतुलन साधा जा सकेगा।











