नई दिल्ली: भारतीय छात्रों की विदेश अध्ययन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और त्वरित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए इलेक्ट्रॉनिक और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के अंतर्गत कार्यरत ‘डिजीलॉकर’ ने एसोसिएशन ऑफ ऑस्ट्रेलियन एजुकेशन रिप्रेजेंटेटिव्स इन इंडिया (AAERI) के साथ एक रणनीतिक समझौता किया है। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य ऑस्ट्रेलिया के शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश पाने के इच्छुक भारतीय विद्यार्थियों के शैक्षणिक दस्तावेजों और प्रमाणपत्रों के सत्यापन को पूरी तरह डिजिटल और सुरक्षित बनाना है।
इस नई व्यवस्था के तहत, ऑस्ट्रेलियाई विश्वविद्यालय और वीजा प्राधिकारी छात्रों की अंकतालिकाओं, डिग्री प्रमाणपत्रों और अन्य आवश्यक कागजातों का सत्यापन सीधे डिजीलॉकर के माध्यम से वास्तविक समय (Real-Time) में कर सकेंगे। इससे कागजी दस्तावेजों की जालसाजी, फर्जी डिग्री के मामलों और मैन्युअल सत्यापन में लगने वाले हफ्तों के लंबे समय से मुक्ति मिलेगी। डिजिटल माध्यम से सत्यापन होने के कारण प्रवेश प्रक्रिया और वीजा अनुमोदन की गति में अभूतपूर्व तेजी देखने को मिलेगी।
शिक्षा क्षेत्र के विशेषज्ञों और छात्र संगठनों ने इस पहल का स्वागत करते हुए इसे भारतीय युवाओं के लिए एक बड़ी राहत बताया है। इस साझेदारी से न केवल प्रक्रियात्मक देरी कम होगी बल्कि छात्रों के समय और धन दोनों की बचत होगी। यह समझौता भारत के डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर की बढ़ती वैश्विक स्वीकार्यता को दर्शाता है और भविष्य में अन्य देशों के साथ भी इसी प्रकार के डिजिटल सहयोग के मार्ग प्रशस्त करेगा।











