ग्लासगो/नई दिल्ली: स्कॉटलैंड के ग्लासगो में आयोजित हो रहे ‘कॉमनवेल्थ गेम्स 2026’ (CWG 2026) के मंच पर भारत की स्टार भारोत्तोलक (Weightlifter) और टोक्यो ओलंपिक पदक विजेता मीराबाई चानू (Mirabai Chanu) ने स्वर्णिम इतिहास रच दिया है। 49 किग्रा महिला भारोत्तोलन वर्ग में अपने प्रतिद्वंद्वियों को मीलों पीछे छोड़ते हुए मीराबाई चानू ने भारत के लिए 2026 राष्ट्रमंडल खेलों का पहला स्वर्ण पदक (Gold Medal) अपने नाम कड़ाई से कर लिया है। स्वर्णिम जीत के बाद पोडियम पर तिरंगा फहराते हुए चानू ने अपने भावुक बयान में कहा—“मेरा पूरा ध्यान किसी नए रिकॉर्ड को तोड़ने पर नहीं था, बल्कि मेरा केवल एक ही लक्ष्य था कि मैं अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन दूं और अपने देश के लिए गोल्ड मेडल जीतूं।”
ग्लासगो वेटलिफ्टिंग एरीना से मिले आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, मीराबाई चानू ने स्नैच (Snatch) और क्लीन एंड जर्क (Clean & Jerk) दोनों श्रेणियों में कुल मिलाकर कड़ा भार उठाते हुए स्वर्ण पदक पर एकतरफा कब्जा जमाया। चोटों से उबरकर रिंग में वापसी करने वाली मीराबाई की यह लगातार तीसरी राष्ट्रमंडल खेलों की स्वर्णिम सफलता है, जो उनकी अटूट इच्छाशक्ति और बेमिसाल ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को साबित करती है। उनके इस ऐतिहासिक स्वर्ण पदक के साथ ही ग्लासगो में भारतीय दल के पदक अभियान का स्वर्णिम खाता कड़ाई से खुल गया है, जिसने पूरे देश को जश्न के माहौल में डुबो दिया है।
मीराबाई चानू का यह भयंकर और प्रेरणादायक प्रदर्शन उन वामपंथी टूलकिट खेल विश्लेषकों और संशयवादियों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो चोट के बाद उनकी फिटनेस और क्षमता पर सवाल खड़े कर रहे थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन और पोडियम पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की आक्रामक खेल नीति को जीने वाली मणिपुर की इस शेरनी ने दुनिया को दिखा दिया है कि भारतीय नारियों का लोहा पूरा विश्व मानता है। इस कड़क और पारदर्शी स्वर्णिम प्रहार के बाद भारतीय दल अब कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की मेडल तालिका में अपनी धाक जमाने के लिए पूरी तरह से फ्रंट-फुट पर आ चुका है।









