ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: रक्षामंत्री ने सेना के अदम्य साहस को किया नमन, बोले- “यह शौर्य और संकल्प की गाथा है”

भारत के सैन्य इतिहास में एक स्वर्णिम अध्याय के रूप में दर्ज ‘ऑपरेशन सिंदूर’ को आज एक वर्ष पूरा हो गया है। इस अवसर पर रक्षामंत्री ने नई दिल्ली में आयोजित एक विशेष कार्यक्रम के दौरान भारतीय सेनाओं के अदम्य साहस, समर्पण और अद्वितीय शौर्य को याद किया। रक्षामंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि ऑपरेशन सिंदूर केवल एक सैन्य मिशन नहीं था, बल्कि यह भारत की सीमाओं की रक्षा के प्रति हमारे सैनिकों के अटूट संकल्प और कठिन परिस्थितियों में भी विजय प्राप्त करने की उनकी क्षमता का जीवंत प्रमाण है। उन्होंने उन जांबाज जवानों को भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित की जिन्होंने इस ऑपरेशन के दौरान मातृभूमि की रक्षा के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। रक्षामंत्री के अनुसार, आज जब हम इस अभियान की पहली वर्षगांठ मना रहे हैं, तो यह पूरी दुनिया के लिए एक स्पष्ट संदेश है कि भारत अपनी संप्रभुता और अखंडता के साथ किसी भी कीमत पर समझौता नहीं करेगा।

ऑपरेशन सिंदूर की रणनीतिक सफलता की सराहना करते हुए रक्षामंत्री ने रेखांकित किया कि किस प्रकार थल सेना और वायु सेना के बीच सटीक समन्वय ने इस मिशन को सफल बनाया। यह ऑपरेशन विशेष रूप से अत्यंत चुनौतीपूर्ण भौगोलिक परिस्थितियों और प्रतिकूल मौसम के बीच अंजाम दिया गया था, जिसने भारतीय सेना की ‘सर्जिकल सटीकता’ और युद्ध कौशल को एक नई वैश्विक पहचान दी। रक्षामंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले एक साल में भारत ने अपनी रक्षा क्षमताओं को और अधिक आधुनिक, मारक और आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में तेजी से कदम बढ़ाए हैं। ‘आत्मनिर्भर भारत’ के तहत विकसित स्वदेशी तकनीक और आधुनिक हथियारों ने अग्रिम मोर्चों पर तैनात सैनिकों के मनोबल को सातवें आसमान पर पहुँचा दिया है। उन्होंने यह भी कहा कि इस ऑपरेशन से प्राप्त सीख का उपयोग भविष्य की रक्षा रणनीतियों को और अधिक अभेद्य बनाने के लिए किया जा रहा है।

कार्यक्रम के दौरान रक्षामंत्री ने उन वीर योद्धाओं के परिवारों से भी मुलाकात की और उन्हें आश्वस्त किया कि राष्ट्र हमेशा उनके बलिदान का ऋणी रहेगा। उन्होंने देश के युवाओं से आह्वान किया कि वे ऑपरेशन सिंदूर जैसी गाथाओं से प्रेरणा लें और राष्ट्र निर्माण तथा देश सेवा के लिए समर्पित रहें। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इस ऑपरेशन ने न केवल क्षेत्रीय सुरक्षा के समीकरणों को नई दिशा दी है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भारत की सैन्य साख को भी कई गुना मजबूत किया है। इस विशेष दिवस पर देशभर की सैन्य छावनियों और युद्ध स्मारकों पर गौरव कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है, जहाँ इस ऐतिहासिक मिशन की सफलता को ‘विजय दिवस’ के रूप में मनाया जा रहा है। सरकार ने इस अवसर पर एक विशेष स्मारिका भी जारी करने की घोषणा की है, जो इस साहसी मिशन की वीरतापूर्ण कहानियों को भावी पीढ़ियों के लिए संजोकर रखेगी।

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