भारत सरकार ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के फुजैराह पेट्रोलियम इंडस्ट्रीज जोन (FPIZ) पर हाल ही में हुए आतंकवादी हमले की कड़े शब्दों में निंदा की है। विदेश मंत्रालय (MEA) द्वारा जारी एक आधिकारिक बयान में कहा गया है कि नागरिक बुनियादी ढांचे और महत्वपूर्ण ऊर्जा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाना न केवल अंतरराष्ट्रीय कानूनों का खुला उल्लंघन है, बल्कि यह पूरे खाड़ी क्षेत्र की शांति और सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा भी है। भारत ने स्पष्ट किया है कि वह आतंकवाद के किसी भी रूप के खिलाफ अपनी ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति पर कायम है और इस कठिन समय में संयुक्त अरब अमीरात की सरकार और वहां की जनता के साथ मजबूती से खड़ा है। यह हमला उस समय हुआ है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार पहले से ही आपूर्ति की अनिश्चितताओं से जूझ रहा है, और फुजैराह जैसे सामरिक तेल केंद्र पर हमले से अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक गलियारों में चिंता की लहर दौड़ गई है।
रणनीतिक दृष्टि से फुजैराह का महत्व भारत के लिए अत्यंत अधिक है, क्योंकि यह होर्मुज जलडमरूमध्य के बाहर स्थित दुनिया के सबसे बड़े तेल बंकरिंग बंदरगाहों में से एक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों से आयात करता है, और इस तरह के हमले सीधे तौर पर भारत की ऊर्जा सुरक्षा (Energy Security) को प्रभावित करने की क्षमता रखते हैं। इसके अलावा, संयुक्त अरब अमीरात में लाखों की संख्या में भारतीय प्रवासी रहते हैं, जिनकी सुरक्षा और कल्याण भारत की विदेश नीति की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है। विदेश मंत्रालय ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से अपील की है कि वे इस तरह की विनाशकारी गतिविधियों को रोकने के लिए एकजुट हों और उन ताकतों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करें जो क्षेत्रीय स्थिरता को अस्थिर करने का प्रयास कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निंदा प्रस्ताव भारत और यूएई के बीच मजबूत होते रक्षा और सामरिक संबंधों को भी दर्शाता है।
इस घटना के बाद, भारत और यूएई के सुरक्षा अधिकारियों के बीच उच्च स्तरीय बातचीत की भी खबरें हैं, जिसमें समुद्री सुरक्षा और खुफिया जानकारी साझा करने पर जोर दिया गया है। भारत ने बार-बार वैश्विक मंचों पर यह मुद्दा उठाया है कि ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखला (Energy Supply Chain) को सुरक्षित रखना वैश्विक आर्थिक विकास के लिए अनिवार्य है। फिलहाल, यूएई के अधिकारियों ने स्थिति पर नियंत्रण पा लिया है और जांच जारी है, लेकिन भारत की यह त्वरित प्रतिक्रिया वैश्विक कूटनीति में उसके बढ़ते कद और क्षेत्रीय शांति के प्रति उसकी प्रतिबद्धता को रेखांकित करती है। आने वाले दिनों में, भारत इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र और अन्य बहुपक्षीय मंचों पर भी उठा सकता है ताकि महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे की सुरक्षा के लिए एक मजबूत अंतरराष्ट्रीय ढांचा तैयार किया जा सके।











