वॉशिंगटन: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में अवैध हेरफेर करने वाली ताकतों और विदेशी कंपनियों के खिलाफ अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक प्रहार किया है। ट्रंप ने एक नए कार्यकारी आदेश (Executive Order) पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसके तहत सीमा शुल्क (Customs) प्रवर्तन को कड़ा करते हुए टैरिफ चोरी करने वाले आयातकों और शेल कंपनियों की सख्त आपराधिक जांच की जाएगी। अमेरिकी प्रशासन का यह कड़ा कदम सीधे तौर पर उन वैश्विक ताकतों और विदेशी कंपनियों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो फर्जी दस्तावेजों और रूटिंग घोटालों के जरिए अमेरिका के घरेलू उद्योगों को नुकसान पहुंचा रही थीं।
व्हाइट हाउस के व्यापार सलाहकार पीटर नवारो ने इस ऐतिहासिक कार्रवाई की पुष्टि करते हुए बताया कि अमेरिकी सीमा शुल्क अधिकारी अब रीयल-टाइम में हर एक जहाज और खेप को ट्रैक करने के लिए एडवांस्ड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग का इस्तेमाल करेंगे। इस सख्त जांच के दायरे में विशेष रूप से चीन से आने वाले वो सामान होंगे जिन्हें टैक्स से बचाने के लिए वियतनाम, मलेशिया या अन्य देशों के रास्ते अवैध रूप से अमेरिका भेजा जाता है। इस ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) नीति के तहत नियमों का उल्लंघन करने वाले आयातकों पर भारी-भरकम जुर्माने के साथ 20 साल तक की जेल की सजा का प्रावधान किया गया है। अमेरिकी सरकार का लक्ष्य इस कड़े एक्शन के जरिए केवल टैरिफ चोरी रोककर अरबों डॉलर का राजस्व वसूलना नहीं, बल्कि अमेरिकी कामगारों और स्वदेशी मैन्युफैक्चरर्स के हितों की हर कीमत पर रक्षा करना है।











