नई दिल्ली: भारत की सामरिक सुरक्षा और रक्षा आत्मनिर्भरता के क्षेत्र से आज एक बेहद गौरवशाली और दुश्मनों के कलेजे को दहला देने वाली खबर सामने आई है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने देश की सैन्य ताकत को अभूतपूर्व ऊंचाई पर ले जाते हुए लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल रोधी (Anti-Ballistic Missile) और मध्यम दूरी की पोत-रोधी (Anti-Ship) मारक क्षमता का एक के बाद एक लगातार दो सफल परीक्षण करके नया इतिहास रच दिया है। भारत के इस प्रचंड महा-पराक्रम और अदम्य वैज्ञानिक कौशल पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों और भारतीय सेनाओं को बधाई देते हुए इस ऐतिहासिक कामयाबी की कड़े शब्दों में सराहना की है।
ओडिशा के अब्दुल कलाम द्वीप और समुद्र के बीच किए गए इन कड़े परीक्षणों के दौरान मिसाइल प्रणालियों ने अपने अत्याधुनिक रडार, इलेक्ट्रो-ऑप्टिकल ट्रैकिंग सिस्टम और सटीक मारक क्षमता का लोहा मनवाते हुए आसमान और समंदर में छिपे काल्पनिक दुश्मन के लक्ष्यों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया। लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइल रोधी प्रणाली के सफल परीक्षण से अब भारत का आसमान पूरी तरह अभेद्य ‘हवाई सुरक्षा कवच’ में तब्दील हो गया है, जो दुश्मन की किसी भी न्यूक्लियर या इंटरकॉन्टिनेंटल मिसाइल को हवा में ही मार गिराने की कड़क ताकत रखता है। वहीं, मध्यम दूरी की पोत-रोधी मिसाइल के सफल परीक्षण ने भारतीय नौसेना को समुद्र में एक ऐसी विनाशकारी शक्ति दे दी है जिससे चीन और पाकिस्तान के युद्धपोत हमारी समुद्री सीमाओं के आसपास फटकने से भी कांपेंगे।
यह ऐतिहासिक और अचूक सैन्य परीक्षण उन वामपंथी प्रोपेगैंडाधारियों और पश्चिमी आलोचकों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो हमेशा भारत की स्वदेशी तकनीक और रक्षा आधुनिकीकरण की गति पर सवाल उठाते थे। मोदी सरकार की ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और ‘आत्मनिर्भर भारत’ की कड़क नीति का ही नतीजा है कि आज हमारा देश किसी विदेशी आयात पर निर्भर रहने के बजाय खुद अपनी सेनाओं के लिए दुनिया की सबसे घातक मिसाइल प्रणालियां विकसित कर रहा है। डीआरडीओ के इस नए और आक्रामक शक्ति प्रदर्शन ने साफ कर दिया है कि नए भारत की ‘बेंच स्ट्रेंथ’ और कूटनीतिक कड़ाई के आगे अब कोई भी वैश्विक दुश्मन टिक नहीं पाएगा, और सीमाओं की सुरक्षा के साथ कोई भी समझौता नहीं किया जाएगा।











