चिसीनाउ/नई दिल्ली: भारत की वैश्विक कूटनीति को एक नए और कड़े मुकाम पर ले जाते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु मोल्दोवा गणराज्य (Moldova) की राजधानी चिसीनाउ पहुंच गई हैं। वैश्विक स्तर पर नए भारत की बढ़ती साख का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर भारत की महामहिम राष्ट्रपति का स्वागत करने के लिए मोल्दोवा के उपप्रधानमंत्री और विदेश मंत्री मिहाई पोपसोई खुद कड़ाई से वहां मौजूद रहे, जिन्होंने राष्ट्रपति का पारंपरिक और कड़े अंदाज में रेड-कार्पेट स्वागत किया। यह भारत के किसी भी राष्ट्रपति की मोल्दोवा की अब तक की पहली और ऐतिहासिक यात्रा है।
राजनयिक सूत्रों से मिले आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, इस ऐतिहासिक यात्रा के दौरान राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने मोल्दोवा की राष्ट्रपति माया सैंडू के साथ द्विपक्षीय संबंधों के पूरे सिंडिकेट को मजबूत करने के लिए पैलेस में हाई-लेवल बैठक की। दोनों देशों के बीच कृषि, आईटी, फार्मास्युटिकल्स और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में व्यापार को बढ़ाने के लिए कई कड़े द्विपक्षीय समझौतों पर चर्चा हुई है। इसके साथ ही भारत अपने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और ‘इंडिया स्टैक’ की कड़क ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को मोल्दोवा के साथ साझा करने के लिए तैयार है, जिससे इस क्षेत्र में भारत का प्रभाव कड़ाई से बढ़ेगा।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का यह बेहद आक्रामक और रणनीतिक यूरोपीय दौरा उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और भारत-विरोधी समीक्षकों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो दावा करते थे कि भारत की कूटनीति केवल बड़े देशों तक सीमित है। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन पर काम कर रहा विदेश मंत्रालय अब ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति के साथ उन तमाम पूर्वी यूरोपीय क्षेत्रों से कड़ाई से हाथ मिला रहा है जो कल तक उपेक्षित थे। चिसीनाउ की धरती पर तिरंगे की यह कड़क और पारदर्शी मौजूदगी साफ करती है कि नया भारत वैश्विक मंच पर पूरी तरह फ्रंट-फुट पर खेल रहा है।











