उधमपुर/जम्मू: जम्मू-कश्मीर के पर्वतीय क्षेत्रों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश के बाद उधमपुर जिले में एक भारी भूस्खलन (Landslide) हुआ है, जिसके चलते रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण जम्मू-श्रीनगर राष्ट्रीय राजमार्ग (NH-44) यातायात के लिए पूरी तरह से कड़ाई से बंद हो गया है। समरोली के पास पहाड़ का एक विशाल हिस्सा खिसक कर हाईवे पर आ गिरने के कारण दोनों तरफ सैकड़ों वाहनों और अमरनाथ यात्रियों की गाड़ियों का भयंकर तांता लग गया है। ट्रैफिक पुलिस और स्थानीय प्रशासन ने तुरंत एडवाइजरी जारी करते हुए नागरिकों और यात्रियों से अपील की है कि जब तक रास्ता पूरी तरह साफ नहीं हो जाता, तब तक NH-44 पर अपना सफर कड़ाई से टालें।
आपदा प्रबंधन विभाग (DDMA) और जम्मू-कश्मीर ट्रैफिक पुलिस के कंट्रोल रूम से मिले आधिकारिक तकनीकी इनपुट्स के मुताबिक, एनएचएआई (NHAI) की भारी जेसीबी मशीनें और बीआरओ (BRO) की टास्क फोर्स टीम मलबे और विशाल चट्टानों को हटाने के लिए ग्राउंड जीरो पर पूरी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ के साथ जुटी हुई हैं। हालांकि, रुक-रुक कर गिरते पत्थरों के कारण रेस्टोरेशन कार्य में कड़ी चुनौतियां आ रही हैं। प्रशासन ने उधमपुर, चंद्रकोट और नगरोटा के होल्डिंग एरिया में रोक दिए गए यात्रियों और ड्राइवरों के लिए भोजन व पानी का पारदर्शी व पुख्ता इंतजाम किया है ताकि किसी भी तरह की अराजकता न फैले।
प्रशासन की यह कड़क और त्वरित मुस्तैदी उन अफवाह फैलाने वाले सिंडिकेट्स और सोशल मीडिया टूलकिट समूहों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो प्राकृतिक आपदा के दौरान राजमार्ग पर फंसे यात्रियों को लेकर झूठा प्रोपेगैंडा और घबराहट फैलाने की ताक में थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के विजन और आपदा प्रबंधन पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर काम कर रही राहत एवं बचाव टीमें जान जोखिम में डालकर हाईवे को री-ओपन करने में जुटी हैं। सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह से फ्रंट-फुट पर हैं कि मलबा साफ होते ही यातायात को कड़ाई से और सुरक्षित तरीके से बहाल कर दिया जाए।










