पुणे: पवित्र श्रावण मास के अवसर पर महाराष्ट्र के पुणे जिले में सह्याद्रि की पहाड़ियों पर स्थित द्वादश ज्योतिर्लिंगों में से एक ‘भीमाशंकर मंदिर’ में श्रद्धालुओं का सैलाब उमड़ रहा है। भीमा नदी के उद्गम स्थल पर बसा यह पावन धाम न केवल अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि यहाँ भगवान शिव की अर्धनारीश्वर रूप में की जाने वाली विशेष पूजा इसे अन्य सभी ज्योतिर्लिंगों से अलग और विशिष्ट बनाती है। सावन के महीने में यहाँ जलाभिषेक और दर्शन का विशेष महत्व माना जाता है।
भीमाशंकर ज्योतिर्लिंग की सबसे बड़ी खासियत इसका स्वयंभू शिवलिंग है, जो दो भागों में विभाजित दिखाई देता है। इस दिव्य लिंग का एक भाग भगवान शिव और दूसरा भाग माता पार्वती का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि यहाँ महादेव और आद्यशक्ति की संयुक्त आराधना की जाती है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, त्रिपुरासुर के पुत्र भीमा नामक दैत्य के अत्याचारों से मुक्ति दिलाने के लिए भगवान शिव ने इसी स्थान पर अवतार लिया था और युद्ध के बाद अपने स्वेद (पसीने) से भीमा नदी को प्रकट किया था।
श्रावण मास के दौरान यहाँ प्रतिदिन विशेष महापूजा, श्रृंगार और रुद्राभिषेक आयोजित किए जाते हैं। देशभर से आने वाले लाखों कांवड़िए और शिवभक्त भीमा नदी के पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक कर मनोवांछित फल प्राप्त करते हैं। स्थानीय प्रशासन और मंदिर ट्रस्ट ने श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा, कतार प्रबंधन, चिकित्सा और सुगम दर्शन के लिए व्यापक इंतजाम किए हैं, जिससे पूरा सह्याद्रि क्षेत्र ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गुंजायमान है।









