नई दिल्ली: देश भर में 14 सितंबर का दिन हिंदी दिवस के रूप में पूर्ण गरिमा और उत्साह के साथ मनाया गया। यह ऐतिहासिक तिथि 1949 के उस निर्णायक क्षण की स्मृति कराती है, जब स्वतंत्र भारत की संविधान सभा ने व्यापक विमर्श के उपरांत हिंदी को देश की संघ की राजभाषा के रूप में अंगीकार करने का संवैधानिक फैसला लिया था।
संविधान के निर्माण के समय भाषाई विविधता के बीच प्रशासनिक कार्यों के लिए एक सर्वमान्य सूत्र तैयार करने को लेकर लंबी बहस हुई थी। संविधान सभा ने संविधान के अनुच्छेद 343 के तहत देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली हिंदी को आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकृति दी। इस फैसले का उद्देश्य नवस्वतंत्र राष्ट्र में प्रशासनिक कामकाज को जनता के निकट लाना और राष्ट्रीय स्तर पर संवाद को सुगम बनाना था।
हिंदी दिवस का यह वार्षिक आयोजन केवल अतीत के फैसले का स्मरण नहीं है, बल्कि यह वर्तमान प्रशासनिक ढांचे, डिजिटल माध्यमों और जनसंवाद में राजभाषा के निरंतर प्रयोग और संवर्धन की समीक्षा का भी मंच है। देश के विभिन्न संस्थानों और सरकारी विभागों में इस अवसर पर भाषा के सहज और प्रभावी प्रयोग को बढ़ावा देने के संकल्प के साथ विशेष सत्र आयोजित किए गए।











