मुजफ्फराबाद: पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में मानवाधिकारों के हनन और नागरिक असंतोष को कुचलने के लिए पाकिस्तानी सुरक्षा बलों द्वारा की गई सैन्य कार्रवाई में कम से कम 18 लोगों की जान जाने और दर्जनों के गंभीर रूप से घायल होने की पुष्टि हुई है। रावतकोट समेत कई संवेदनशील इलाकों में बुनियादी अधिकारों, महंगाई और राजनीतिक उत्पीड़न के खिलाफ शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे नागरिकों पर सुरक्षा बलों ने कथित तौर पर सैन्य ग्रेड के ड्रोनों और स्वचालित हथियारों से भारी बमबारी और गोलीबारी की।
प्रत्यक्षदर्शियों और स्थानीय नागरिक अधिकार संगठनों के अनुसार, सुरक्षा बलों ने विरोध प्रदर्शनों के मुख्य केंद्रों और रिहायशी परिसरों को निशाना बनाकर चारों तरफ से घातक प्रहार किए। कई चश्मदीदों ने आरोप लगाया कि हमले के बाद दहशत का माहौल बनाने के लिए सुरक्षाबलों ने घटनास्थल की घेराबंदी कर दी और परिजनों को अपने प्रियजनों के शव तक उठाने से रोक दिया। स्थानीय नेताओं ने घटनास्थल से ड्रोन हमलों के अवशेष और रॉकेट के टुकड़ों को सार्वजनिक करते हुए इसे निहत्थी जनता पर थोपा गया सैन्य अत्याचार करार दिया है।
इस भीषण रक्तपात के बाद पूरे क्षेत्र में आक्रोश की लहर फैल गई है और जगह-जगह पाकिस्तानी प्रशासन के खिलाफ तीखे प्रदर्शन शुरू हो गए हैं। मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और स्थानीय संगठनों ने संयुक्त राष्ट्र सहित अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार एजेंसियों से इस बर्बर कार्रवाई का तुरंत संज्ञान लेने और निष्पक्ष अंतरराष्ट्रीय जांच कराने की मांग की है। बिगड़ते हालात को देखते हुए क्षेत्र में संचार सेवाएं और इंटरनेट बंद कर दिए गए हैं, जिससे तनाव और गहराता जा रहा है।











