प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत और नॉर्वे के बीच द्विपक्षीय संबंधों को एक नए ऐतिहासिक स्तर पर ले जाते हुए ‘ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ (Green Strategic Partnership) की घोषणा की है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री के साथ हुई उच्च-स्तरीय वर्चुअल बैठक के बाद मीडिया को संबोधित करते हुए पीएम मोदी ने कहा कि यह नई साझेदारी दोनों देशों के रिश्तों को एक नया आयाम देगी। इसका मुख्य उद्देश्य जलवायु परिवर्तन की वैश्विक चुनौतियों से निपटना, स्वच्छ ऊर्जा का विस्तार करना और सतत आर्थिक विकास को बढ़ावा देना है। प्रधानमंत्री ने रेखांकित किया कि नॉर्वे के पास पर्यावरण संरक्षण, पवन ऊर्जा (Wind Energy) और अपतटीय तकनीकों का व्यापक अनुभव है, जबकि भारत के पास एक विशाल बाजार और हरित लक्ष्यों को हासिल करने की अटूट प्रतिबद्धता है। इन दोनों शक्तियों का मिलन वैश्विक पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक क्रांतिकारी कदम साबित होगा।
इस नए समझौते के तहत दोनों देशों ने मुख्य रूप से अक्षय ऊर्जा (Renewable Energy), ग्रीन हाइड्रोजन, और महासागरीय अर्थव्यवस्था (Blue Economy) के क्षेत्रों में संयुक्त निवेश और तकनीकी आदान-प्रदान को बढ़ाने का निर्णय लिया है। पीएम मोदी ने बताया कि भारत के ‘राष्ट्रीय हरित हाइड्रोजन मिशन’ को नॉर्वे की उन्नत इलेक्ट्रोलाइज़र तकनीक और विनिर्माण विशेषज्ञता से भारी प्रोत्साहन मिलेगा। इसके अलावा, दोनों देश समुद्र विज्ञान और प्लास्टिक कचरा प्रबंधन के लिए एक साझा कार्यबल (Task Force) का गठन करेंगे, जो तटीय क्षेत्रों में प्रदूषण नियंत्रण के लिए काम करेगा। नॉर्वे का सॉवरेन वेल्थ फंड (Sovereign Wealth Fund) भी भारत की बुनियादी ढांचा और नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं में अपना निवेश बढ़ाने पर सहमत हुआ है, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा सकारात्मक संकेत है।
रणनीतिक दृष्टिकोण से भी इस साझेदारी को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और नॉर्वे का यह बढ़ता तालमेल हिंद-प्रशांत क्षेत्र और आर्कटिक क्षेत्र में समुद्री सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय नियमों के पालन को सुनिश्चित करने में मदद करेगा। इस अवसर पर दोनों नेताओं ने वैश्विक भू-राजनीतिक स्थितियों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग मजबूत करने का संकल्प लिया। पीएम मोदी ने विश्वास व्यक्त किया कि ‘ग्रीन स्ट्रेटजिक पार्टनरशिप’ न केवल दोनों देशों के उद्योगों और स्टार्टअप्स के लिए नए वाणिज्यिक अवसर पैदा करेगी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित पृथ्वी के निर्माण का मार्ग भी प्रशस्त करेगी।











