नई दिल्ली, 8 मई 2026: पश्चिम एशिया और विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी भारी तनाव के बीच भारत के लिए एक बड़ी राहत भरी खबर सामने आई है। विदेश मंत्रालय (MEA) ने आज आधिकारिक जानकारी देते हुए बताया कि ईरान के साथ हुई गहन राजनयिक बातचीत के सफल परिणाम स्वरूप, क्षेत्र में फंसे 11 भारतीय मालवाहक जहाज सुरक्षित रूप से बाहर निकल आए हैं। मंत्रालय के प्रवक्ता के अनुसार, इन जहाजों को अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की ओर सुरक्षित गलियारा प्रदान किया गया है। हालांकि, स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है क्योंकि मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि 13 अन्य भारतीय जहाज और उनके चालक दल अभी भी उसी अशांत क्षेत्र में मौजूद हैं। भारत सरकार इन शेष जहाजों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित करने के लिए ईरानी अधिकारियों और क्षेत्र के अन्य महत्वपूर्ण हितधारकों के साथ लगातार संपर्क में है।
यह कूटनीतिक सफलता ऐसे समय में आई है जब अमेरिका द्वारा शुरू किए गए ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के कारण खाड़ी क्षेत्र में सैन्य हलचल अपने चरम पर है। भारत ने शुरू से ही इस संकट में ‘मध्यस्थ’ और ‘संतुलित’ रुख अपनाया है, जिससे उसे तेहरान के साथ सीधे संवाद का लाभ मिला है। विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की है कि सुरक्षित निकले 11 जहाजों में से अधिकांश तेल टैंकर और कच्चा माल ढोने वाले जहाज हैं, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। मंत्रालय ने यह भी आश्वासन दिया है कि क्षेत्र में मौजूद शेष 13 जहाजों के चालक दल के सदस्य पूरी तरह सुरक्षित हैं और उन्हें आवश्यक रसद और चिकित्सा सहायता पहुँचाने के प्रयास किए जा रहे हैं। भारतीय नौसेना के युद्धपोत भी ‘ऑपरेशन संकल्प’ के तहत आसपास के अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र में मुस्तैद हैं ताकि किसी भी आपात स्थिति में तुरंत प्रतिक्रिया दी जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत की यह ‘सॉफ्ट पावर’ कूटनीति वैश्विक मंच पर उसकी बढ़ती साख का प्रमाण है। जहाँ एक ओर अमेरिका और ईरान के बीच सीधे टकराव की स्थिति बनी हुई है, वहीं भारत ने अपने मजबूत द्विपक्षीय संबंधों का उपयोग कर अपने वाणिज्यिक हितों की रक्षा की है। विदेश मंत्री ने स्वयं इस मामले की निगरानी की है और संकेत दिए हैं कि अगले 48 से 72 घंटों में शेष जहाजों की आवाजाही को लेकर भी कोई सकारात्मक निर्णय लिया जा सकता है। फिलहाल, भारत ने अपने सभी शिपिंग ऑपरेटरों को सलाह दी है कि वे होर्मुज की खाड़ी से गुजरते समय अतिरिक्त सावधानी बरतें और भारतीय नौसेना के समन्वय केंद्र (Information Fusion Centre) के साथ निरंतर संपर्क में रहें। वैश्विक तेल बाजार भी इस घटनाक्रम पर बारीक नजर रखे हुए है, क्योंकि होर्मुज से जहाजों का सुरक्षित निकलना आपूर्ति श्रृंखला की स्थिरता के लिए एक सकारात्मक संकेत है।











