मिडिल ईस्ट में युद्ध की आहट से दहला बाजार: सेंसेक्स 550 अंक टूटा, निफ्टी 24,000 के नीचे; कच्चे तेल में उबाल

खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिका-ईरान के बीच बढ़ती तनातनी ने आज भारतीय शेयर बाजार की कमर तोड़ दी है। मंगलवार, 5 मई 2026 को कारोबार की शुरुआत होते ही बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का सेंसेक्स 550 अंकों से अधिक फिसलकर 76,300 के स्तर के नीचे चला गया, जबकि निफ्टी 50 इंडेक्स 180 अंकों की भारी गिरावट के साथ 23,950 के मनोवैज्ञानिक स्तर के नीचे कारोबार करता नजर आया। बाजार में इस भगदड़ का मुख्य कारण संयुक्त अरब अमीरात के फुजैराह (Fujairah) पेट्रोलियम जोन पर हुआ हालिया हमला है, जिसमें तीन भारतीय नागरिकों के घायल होने की भी खबर है। इस घटना के बाद वैश्विक बाजार में ब्रेंट क्रूड की कीमतें 3% से अधिक उछलकर 114 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुँच गई हैं, जिससे भारत जैसे तेल आयातक देश के लिए मुद्रास्फीति और राजकोषीय घाटे का संकट गहरा गया है।

बाजार में चौतरफा बिकवाली का माहौल है, जिसमें बैंकिंग, ऑटो और रियल्टी सेक्टर को सबसे अधिक नुकसान उठाना पड़ा है। आईसीआईसीआई बैंक, एचडीएफसी बैंक और मारुति सुजुकी जैसे बड़े शेयरों में 2% तक की गिरावट दर्ज की गई है। विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने ‘रिस्क-ऑफ’ सेंटिमेंट के चलते भारतीय बाजारों से भारी निकासी शुरू कर दी है, जिसका असर भारतीय रुपये पर भी पड़ा है। रुपया आज अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 95.3 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर जा गिरा है। विश्लेषकों का कहना है कि हालांकि पश्चिम बंगाल चुनाव में भाजपा की जीत ने कल बाजार को थोड़ा सहारा दिया था, लेकिन वैश्विक भू-राजनीतिक अस्थिरता और तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका ने घरेलू सकारात्मक कारकों को पूरी तरह से दबा दिया है। होर्मुज स्ट्रेट में अमेरिका के ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ और ईरान की जवाबी कार्रवाई ने निवेशकों को सुरक्षित निवेश के विकल्पों जैसे सोना (Gold) की ओर रुख करने के लिए मजबूर कर दिया है।

वर्तमान स्थिति को देखते हुए बाजार विशेषज्ञों ने निवेशकों को अत्यधिक सावधानी बरतने की सलाह दी है। यदि होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव कम नहीं होता है, तो कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं, जो भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ा झटका होगा। फिलहाल, रिलायंस इंडस्ट्रीज और टाटा स्टील जैसे हैवीवेट शेयरों में भी बिकवाली का दबाव बना हुआ है, जबकि केवल रक्षा और दूरसंचार क्षेत्र के कुछ चुनिंदा शेयरों में ही हरियाली देखी जा रही है। बाजार की नजरें अब अमेरिकी फेडरल रिजर्व के रुख और पश्चिम एशिया से आने वाली अगली सैन्य खबरों पर टिकी हैं, जो आने वाले दिनों में निफ्टी और सेंसेक्स की दिशा तय करेंगी।

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