मुंबई: महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सत्ताधारी महायुति गठबंधन ने विपक्ष को चारों खाने चित करते हुए एक कड़क और ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। स्थानीय स्वराज्य संस्था की 17 विधान परिषद सीटों के लिए आए नतीजों में महायुति ने एकतरफा कब्जा जमाते हुए 16 सीटों पर बंपर जीत हासिल की है। इस करारी शिकस्त के साथ ही विपक्षी महाविकास आघाडी (MVA) का पूरी तरह सूपड़ा साफ हो गया है और वे अपना खाता खोलने में भी नाकाम रहे।
इस चुनाव में महायुति ने पहले ही रणनीतिक कड़ाई दिखाते हुए 6 सीटों पर बिनविरोध जीत दर्ज कर ली थी, जिसके बाद बाकी बची 11 सीटों के नतीजे घोषित किए गए। सीटों के गणित को देखें तो भारतीय जनता पार्टी (BJP) सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरी है, जिसने कुल 11 सीटों पर शानदार जीत दर्ज की। वहीं, मुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने 3 सीटों पर और अजीत पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) ने 2 सीटों पर जीत का गुलाल उड़ाया। नाशिक की इकलौती सीट पर महायुति के बागी और निर्दलीय चुनाव लड़े गोकुल गिते ने शिवसेना के उम्मीदवार को हराकर उलटफेर किया, जिससे गठबंधन के अंदरूनी मतभेद और क्रॉस-वोटिंग के आरोप भी सामने आए हैं।
फिर भी, ‘नेशन फर्स्ट’ और कड़क राजनीतिक बेंच स्ट्रेंथ के लिहाज से यह ऐतिहासिक परिणाम उद्धव ठाकरे और शरद पवार खेमे के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है। एक तरफ जहाँ उद्धव ठाकरे के 6 लोकसभा सांसदों की बगावत की खबरें सुर्खियां बटोर रही हैं, वहीं दूसरी तरफ विधान परिषद में महाविकास आघाडी के अपने ही वोट बड़े पैमाने पर टूटने से विपक्षी खेमे में भयंकर मातम और हड़कंप मच गया है। इस महा-विजय ने साबित कर दिया है कि महाराष्ट्र की जनता का भरोसा सिर्फ और सिर्फ महायुति के विकास कार्यों पर है।











