विदेशी शिक्षकों के संकट पर अमेरिकी सांसदों का बड़ा कदम: एच-1बी वीजा नियमों में ढील देने की उठी मांग, अमेरिकी स्कूलों में मचे हाहाकार को शांत करने की तैयारी; वामपंथी यूनियनों को लगा झटका

कम्युनिस्ट चीन के जासूसी नेटवर्क और पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध के बीच, अमेरिकी संसद (कांग्रेस) से भारत और अन्य विदेशी पेशेवरों के लिए एक बहुत ही महत्वपूर्ण और सकारात्मक आर्थिक खबर सामने आई है। अमेरिका के दोनों प्रमुख राजनीतिक दलों (डेमोक्रेटिक और रिपब्लिकन) के सांसदों ने अमेरिकी शिक्षा व्यवस्था को बड़े संकट से उबारने के लिए विदेशी शिक्षकों (Foreign Teachers) को एच-1बी (H-1B) वीजा नियमों में बड़ी राहत देने की जोरदार मांग की है। अमेरिकी सांसदों ने गृह सुरक्षा विभाग (DHS) और विदेश मंत्रालय को पत्र लिखकर मांग की है कि देश के सार्वजनिक और निजी स्कूलों में गणित, विज्ञान (STEM) और विशेष शिक्षा के शिक्षकों की भारी कमी को देखते हुए विदेशी शिक्षकों को ‘कैप-एग्जेंशन’ (सालाना सीमा से छूट) और वीजा फीस में विशेष रियायत दी जानी चाहिए।

अमेरिकी सांसदों द्वारा उठाए गए इस कदम की पृष्ठभूमि में ट्रंप प्रशासन की वह सख्त नीति है, जिसके तहत सितंबर 2025 में एक राष्ट्रपति उद्घोषणा के जरिए एच-1बी वीजा आवेदनों पर $100,000 (लगभग 83 लाख रुपये) की भारी-भरकम फाइलिंग फीस लगा दी गई थी। इस ऐतिहासिक फीस वृद्धि के कारण अमेरिका के हजारों स्कूल और शैक्षणिक संस्थान वित्तीय रूप से पूरी तरह पंगु हो गए थे और वे भारत, फिलीपींस जैसे देशों से योग्य गणित और विज्ञान के शिक्षकों को स्पॉन्सर करने में पूरी तरह असमर्थ साबित हो रहे थे। इसके अलावा, फरवरी 2026 से लागू हुए नए ‘वेज लेवल लॉटरी नियम’ (Wage Level Lottery Rule) ने एंट्री-लेवल के विदेशी शिक्षकों के लिए अमेरिका में टिकना और काम करना लगभग नामुमकिन बना दिया था। इस कड़े प्रशासनिक चक्र के कारण अमेरिकी स्कूलों में शिक्षकों की भारी कमी हो गई, जिससे वहां के स्थानीय छात्रों की पढ़ाई पूरी तरह ठप होने की कगार पर पहुंच गई है।

राष्ट्रवादी विचारकों और अंतरराष्ट्रीय नीति विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी सांसदों का यह कदम ‘अमेरिका फर्स्ट’ (America First) की नीति के तहत एक बेहद व्यावहारिक सुधार है। यह मांग उन वामपंथी शिक्षक यूनियनों (Left-Wing Teacher Unions) के मुंह पर करारा तमाचा है, जो केवल अपने राजनीतिक एजेंडे के लिए विदेशी प्रतिभाओं का विरोध करते हैं और अमेरिकी बच्चों के भविष्य को अंधकार में धकेलते हैं। सांसदों ने साफ किया है कि अमेरिकी स्कूलों को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाए रखने के लिए भारतीय और अन्य विदेशी मूल के अत्यधिक कुशल शिक्षकों की मौजूदगी अनिवार्य है। इस द्विपक्षीय विधायी पहल का उद्देश्य स्वास्थ्य सेवा कार्यकर्ताओं की तर्ज पर शिक्षकों को भी $100,000 की भारी फीस से पूरी तरह मुक्त करना है। गूगल सर्च और प्रवासन पोर्टल्स पर आज ‘US Lawmakers H1B Visa Relief Teachers 2026’ सबसे ऊपर ट्रेंड कर रहा है, क्योंकि इस राहत के मिलते ही हजारों योग्य भारतीय शिक्षकों और पेशेवरों के लिए अमेरिका में सम्मानजनक रोजगार के रास्ते एक बार फिर पूरी तरह खुल जाएंगे।

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