वाशिंगटन/तेहरान: पश्चिम एशिया में जारी भीषण हवाई हमलों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के सर्वोच्च नेतृत्व को सीधे शब्दों में अब तक की सबसे कड़क और अंतिम चेतावनी दे दी है। व्हाइट हाउस (White House) के ओवल ऑफिस से राष्ट्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति ट्रंप ने साफ एलान किया है कि अगर ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों (Nuclear Sites) पर किसी भी तरह की संदिग्ध सैन्य हलचल या संवर्धन बढ़ाने की कोशिश की, तो अमेरिकी सेना बिना किसी देरी के फिर से जोरदार और विनाशकारी हमला करेगी। ट्रंप का यह बयान ईरान पर पिछले 24 घंटों में हुए दो बड़े अमेरिकी हवाई हमलों के ठीक बाद आया है, जिससे दोनों देशों के बीच परमाणु युद्ध (Nuclear War) का कड़ा खतरा पैदा हो गया है।
पेंटागन (Pentagon) के रणनीतिक सूत्रों के मुताबिक, अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने ईरान के फोर्डो (Fordow) और नतांज (Natanz) परमाणु संयंत्रों के आस-पास संदिग्ध गतिविधियों को डिजिटल रूप से ट्रैक किया है, जिसके बाद राष्ट्रपति ने यह आक्रामक स्टैंड लिया है। ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका की ‘क्विक रिस्पॉन्स टीम’ और खाड़ी में तैनात बी-52 (B-52) रणनीतिक बमवर्षक विमानों के बेड़े को पूरी तरह ‘READY-TO-STRIKE’ मोड पर डाल दिया गया है। अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने साफ किया है कि इस बार निशाना सिर्फ सैन्य ठिकाने नहीं, बल्कि ईरान के पूरे परमाणु इंफ्रास्ट्रक्चर का सिंडिकेट होगा, जिससे मध्य पूर्व की भू-राजनीतिक स्थिति बेहद संवेदनशील और कड़क हो गई है।
डोनाल्ड ट्रंप का यह बेहद आक्रामक और साहसिक रुख उन वैश्विक वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और पश्चिमी पैरोकारों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो हमेशा अमेरिकी विदेश नीति को रक्षात्मक और कमजोर बनाने का प्रोपेगैंडा चलाते थे। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) और वैश्विक सुरक्षा पर ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर चल रहे ट्रंप प्रशासन ने साफ कर दिया है कि वह दुनिया के सबसे संवेदनशील इलाके को परमाणु ब्लैकमेलिंग का शिकार नहीं होने देगा। अमेरिका की इस नई और कड़क सैन्य ‘बेंच स्ट्रेंथ’ के प्रदर्शन ने तेहरान के सत्ताधारी खेमे में भयंकर छटपटाहट और सन्नाटा पैदा कर दिया है, और साफ संदेश दिया है कि सुपरपावर अमेरिका अब पूरी तरह फ्रंट-फुट पर खेल रहा है।











