ईरान पर अमेरिकी सेना का भीषण हमला: 24 घंटे में दूसरी बार बरसे बम, दहल उठा पूरा मध्य पूर्व!

तेहरान/वाशिंगटन: पश्चिम एशिया (West Asia) में जारी भयंकर तनाव के बीच वैश्विक महाशक्ति अमेरिका ने ईरान के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी और कड़क सैन्य कार्रवाई का एलान कर दिया है। वाशिंगटन से मिले ग्रीन सिग्नल के बाद अमेरिकी युद्धक विमानों ने ईरान के रणनीतिक ठिकानों पर हमलों का एक नया और विनाशकारी दौर शुरू कर दिया है, जिसके तहत पिछले 24 घंटे के भीतर दूसरी बार अमेरिकी बम कड़ाई से बरसे हैं। पेंटागन द्वारा संचालित इस भीषण हवाई हमले के बाद पूरे मध्य पूर्व में युद्ध के नगाड़े बज गए हैं और ईरान के कई सैन्य ठिकाने, हथियार डिपो और कमांड सेंटर पूरी तरह मलबे में तब्दील हो चुके हैं।

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (Pentagon) के आधिकारिक इनपुट्स के मुताबिक, यह कड़ा हवाई हमला अमेरिकी नौसेना के एयरक्राफ्ट कैरियर और खाड़ी में तैनात लड़ाकू विमानों के जरिए कड़ाई से अंजाम दिया गया है। अमेरिका का दावा है कि ये हमले क्षेत्र में अमेरिकी दूतावासों और सैन्य बेस पर ईरानी समर्थित सिंडिकेट्स द्वारा किए जा रहे ड्रोन हमलों के जवाब में एक ‘प्री-एम्पिव स्ट्राइक’ (Pre-emptive Strike) हैं। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के ठिकानों को चुन-चुनकर निशाना बनाया गया है। इस कड़े सैन्य एक्शन के बाद लाल सागर (Red Sea) और होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अमेरिकी नौसेना की ‘बेंच स्ट्रेंथ’ को हाई-अलर्ट पर रख दिया गया है।

अमेरिका का यह कड़ा और आक्रामक सैन्य एक्शन उन वैश्विक वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और मानवाधिकार के फर्जी पैरोकारों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो अंतरराष्ट्रीय मंचों पर वैश्विक आतंकवाद और अशांति फैलाने वाले देशों का बचाव करते आ रहे थे। अमेरिकी राष्ट्रपति प्रशासन ने साफ संदेश दे दिया है कि वह अपने राजनयिकों और सैनिकों की सुरक्षा के लिए ‘जीरो टॉलरेंस’ (Zero Tolerance) की नीति पर कायम है। दूसरी तरफ, ईरान ने भी इस कड़े हमले के बाद अमेरिकी ठिकानों को तबाह करने की आक्रामक धमकी दी है, जिससे दुनिया भर के बाजारों में कच्चे तेल (Crude Oil) की कीमतों में भयंकर उबाल आने की कड़क आशंका पैदा हो गई है।

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