नई दिल्ली: विदेश सचिव विक्रम मिस्री ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक परिदृश्य को लेकर एक बड़ा बयान देते हुए कहा है कि ग्लोबल साउथ के देशों को अब केवल तय नियमों का पालन करने तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि वैश्विक नियम तय करने वाली प्रक्रिया में सक्रिय निर्माता बनना होगा। उन्होंने रेखांकित किया कि बदलती वैश्विक व्यवस्था में विकासशील देशों की आबादी और आर्थिक ताकत को देखते हुए अंतरराष्ट्रीय नियमों को अधिक समावेशी और संतुलित बनाए जाने की सख्त जरूरत है।
उन्होंने इस बात पर बल दिया कि ऐतिहासिक रूप से वैश्विक नियम और नीतियां कुछ चुनिंदा विकसित देशों द्वारा तय की जाती रही हैं, जिन्हें बाकी दुनिया पर थोप दिया जाता था। आज के समय में जलवायु परिवर्तन, अंतरराष्ट्रीय व्यापार, आपूर्ति श्रृंखला और डिजिटल गवर्नेंस जैसे क्षेत्रों में नए मानदंड तय हो रहे हैं। ऐसे महत्वपूर्ण दौर में यदि ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और चिंताओं को शामिल नहीं किया गया, तो भविष्य की वैश्विक व्यवस्था न्यायसंगत नहीं हो सकेगी।
विदेश सचिव के अनुसार, ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज और एकजुटता ही अंतरराष्ट्रीय मंचों पर उसके अधिकारों की रक्षा कर सकती है। उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को अपनी प्राथमिकताओं के अनुसार वैश्विक एजेंडा तय करने में आगे आना होगा, ताकि वैश्विक शासन व्यवस्था में उनकी भागीदारी मात्र एक औपचारिकता न रहकर एक निर्णायक और नीति-निर्माता शक्ति के रूप में स्थापित हो सके।











