दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल मार्ग, होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में महीनों से जारी गतिरोध को खत्म करने के लिए अमेरिका ने एक बड़ा सैन्य और कूटनीतिक अभियान ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ (Project Freedom) शुरू किया है। इस ऑपरेशन का मुख्य उद्देश्य उन अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों और तेल टैंकरों को सुरक्षित बाहर निकालना है, जिन्हें कथित तौर पर क्षेत्रीय तनाव के कारण वहां रोक लिया गया था या जो सुरक्षा खतरों के चलते आगे नहीं बढ़ पा रहे थे। पेंटागन के सूत्रों के अनुसार, इस प्रोजेक्ट के तहत अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े (US 5th Fleet) को विशेष निर्देश दिए गए हैं कि वे इन जहाजों को सशस्त्र सुरक्षा कवच प्रदान करें और किसी भी संभावित उकसावे की स्थिति में ‘आक्रामक रक्षा’ की नीति अपनाएं। इस अभियान में ब्रिटेन और अन्य सहयोगी शक्तियों के शामिल होने की भी खबरें हैं, जो इस क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र की स्वतंत्रता (Freedom of Navigation) को सुनिश्चित करना चाहते हैं।
रणनीतिक रूप से यह कदम तब उठाया गया है जब वैश्विक ऊर्जा बाजार में तेल की आपूर्ति को लेकर चिंताएं बढ़ गई हैं। होर्मुज स्ट्रेट वह संकरा समुद्री मार्ग है जहाँ से दुनिया के कुल कच्चे तेल का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है। पिछले कुछ हफ्तों में इस मार्ग पर बढ़ी सैन्य गतिविधियों ने वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को बुरी तरह प्रभावित किया है। ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के तहत अमेरिका ने इस क्षेत्र में अपने अत्याधुनिक निगरानी ड्रोन और युद्धपोत तैनात किए हैं ताकि जहाजों के आवागमन में कोई बाधा न आए। व्हाइट हाउस ने एक संक्षिप्त बयान में स्पष्ट किया है कि यह मिशन केवल जहाजों को निकालने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह उन सभी देशों को एक संदेश है जो अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों में बाधा डालने की कोशिश करते हैं।
कूटनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ‘प्रोजेक्ट फ्रीडम’ के शुरू होने से खाड़ी क्षेत्र में कूटनीतिक पारा एक नए चरम पर पहुँच सकता है। ईरान ने पहले ही चेतावनी दी है कि विदेशी सेनाओं की इस क्षेत्र में बढ़ती मौजूदगी सुरक्षा के लिए खतरा पैदा कर सकती है। दूसरी ओर, भारत और जापान जैसे बड़े तेल आयातक देशों ने इस मार्ग की सुरक्षा को लेकर अपनी चिंताएं जाहिर की हैं, क्योंकि उनकी ऊर्जा सुरक्षा काफी हद तक इसी मार्ग की स्थिरता पर निर्भर है। इस ऑपरेशन की सफलता आने वाले समय में न केवल वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित करेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भविष्य में इस सामरिक गलियारे पर किसका प्रभाव रहेगा। वर्तमान में, कई फंसे हुए जहाजों ने अमेरिकी सुरक्षा घेरे में सुरक्षित क्षेत्रों की ओर बढ़ना शुरू कर दिया है, लेकिन पूरे मार्ग को ‘क्लियर’ घोषित करने में अभी कुछ दिन और लग सकते हैं।











