नई दिल्ली: विजयदशमी यानी दशहरा केवल भारत तक सीमित न रहकर दुनिया के कई अन्य देशों में भी बड़े हर्षोल्लास और भव्य सांस्कृतिक स्वरूप में मनाया जाता है। हालांकि, भारत में जहां इस पर्व पर रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों के दहन की मुख्य परंपरा है, वहीं विदेशों में बसे भारतीय समुदायों और स्थानीय संस्कृतियों के बीच इसे बिना पुतला दहन के पारंपरिक पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक आयोजनों के माध्यम से मनाया जाता है।
नेपाल में इसे ‘बड़ा दशैन’ के नाम से राष्ट्रीय स्तर पर धूमधाम से मनाया जाता है, जहां पारिवारिक मेल-मिलाप, बड़ों से आशीर्वाद लेने और ‘टीका-जमरा’ लगाने की अनूठी परंपरा है, जिसमें रावण दहन नहीं किया जाता। इसी तरह मॉरीशस, त्रिनिदाद एवं टोबैगो, गयाना, फिजी और सूरीनाम जैसे देशों में भारतीय मूल के नागरिक मंदिरों में विशेष अनुष्ठान, भजन-कीर्तन और रामलीला के मंचन के साथ अधर्म पर धर्म की विजय का संदेश साझा करते हैं।
पर्यावरण और स्थानीय सुरक्षा नियमों के चलते पश्चिमी देशों जैसे अमेरिका, ब्रिटेन और ऑस्ट्रेलिया में भी पुतला दहन के स्थान पर सांस्कृतिक जुलूस, झांकियां और सामुदायिक भोज आयोजित किए जाते हैं। इन आयोजनों के माध्यम से दुनिया भर में भारतीय संस्कृति की समृद्ध विरासत, एकता और सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार देखने को मिलता है।











