केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने भारतीय निर्यात को लेकर एक बड़ा विज़न पेश करते हुए कहा है कि दुनिया के 38 देशों के साथ चल रही मुक्त व्यापार समझौते (FTA) की वार्ताएं आगामी वर्षों में देश के निर्यात को एक नई ऐतिहासिक ऊंचाई पर ले जाएंगी। नई दिल्ली में आयोजित एक व्यापार शिखर सम्मेलन को संबोधित करते हुए केंद्रीय मंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार इस समय आक्रामक और सुरक्षात्मक दोनों ही रणनीतियों पर काम कर रही है। इन 38 देशों में यूरोपीय संघ (EU), ब्रिटेन (UK), और खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के देश शामिल हैं, जिनके साथ अंतिम दौर की कूटनीतिक और आर्थिक बातचीत चल रही है। पीयूष गोयल के अनुसार, इन समझौतों के लागू होने से न केवल भारतीय विनिर्माताओं (Manufacturers) को अंतरराष्ट्रीय बाजारों में ‘जीरो-ड्यूटी’ एक्सेस मिलेगा, बल्कि यह भारत के निर्यात को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी भी बनाएगा।
वाणिज्य मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन एफटीए का मुख्य उद्देश्य केवल निर्यात बढ़ाना नहीं, बल्कि देश के व्यापार घाटे (Trade Deficit) को तार्किक रूप से कम करना है। उन्होंने आलोचकों को जवाब देते हुए कहा कि भारत अब कमजोर स्थिति में समझौते नहीं करता, बल्कि ‘बराबरी और आपसी लाभ’ के सिद्धांतों पर सौदेबाजी करता है। इन समझौतों से विशेष रूप से भारत के कपड़ा (Textiles), रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान, और फार्मास्यूटिकल्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों (Labor-Intensive Sectors) को भारी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है, जिससे घरेलू स्तर पर लाखों नए रोजगार पैदा होंगे। इसके अतिरिक्त, सेवा क्षेत्र (Services Sector) में भारतीय पेशेवरों और आईटी विशेषज्ञों के लिए इन देशों में वीज़ा और काम करने की प्रक्रियाओं को आसान बनाना भी इन वार्ताओं का एक मुख्य एजेंडा रहा है।
वैश्विक भू-राजनीतिक तनावों और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) में आ रहे व्यवधानों के बीच, पीयूष गोयल ने भारतीय उद्योग जगत से अपील की कि वे अपनी गुणवत्ता मानकों (Quality Standards) में सुधार करें ताकि ‘मेक इन इंडिया’ ब्रांड दुनिया का सबसे भरोसेमंद नाम बन सके। उन्होंने कहा कि सरकार बुनियादी ढांचे के विकास, लॉजिस्टिक्स लागत को कम करने और ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ के माध्यम से उद्योगों को हर संभव सहायता दे रही है। केंद्रीय मंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि 38 देशों के साथ यह व्यापक व्यापारिक एकीकरण भारत को वैश्विक विनिर्माण केंद्र (Global Manufacturing Hub) बनाने के सपने को साकार करेगा और 2030 तक देश के कुल निर्यात को 2 ट्रिलियन डॉलर के महत्वाकांक्षी लक्ष्य तक पहुँचाने में सबसे महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।











