देशभर में सीएनजी की कीमतों में हुई बढ़ोतरी के तुरंत बाद अब आम जनता को महंगाई का एक और बड़ा झटका लगा है। तेल विपणन कंपनियों (OMCs) ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी और लाल सागर व होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी भू-राजनीतिक तनाव का हवाला देते हुए पेट्रोल और डीजल के दामों में बड़ा इजाफा कर दिया है। नई दरें लागू होने के बाद, देश की राजधानी दिल्ली में पेट्रोल की कीमत बढ़कर ₹98.64 प्रति लीटर और डीजल की कीमत ₹91.58 प्रति लीटर के ऐतिहासिक स्तर पर पहुँच गई है। यह बढ़ोतरी पिछले कई महीनों की स्थिरता के बाद दर्ज की गई है, जिसने दिल्ली-एनसीआर सहित पूरे देश के वाहन चालकों और माल ढुलाई ऑपरेटरों की चिंता बढ़ा दी है।
दिल्ली के अलावा देश के अन्य महानगरों में भी ईंधन की कीमतों में भारी उछाल दर्ज किया गया है। आर्थिक राजधानी मुंबई में पेट्रोल अब ₹105 प्रति लीटर के पार चला गया है, जबकि डीजल भी ₹98 के स्तर को छू रहा है। चेन्नई और कोलकाता में भी ईंधन की कीमतों में प्रति लीटर ₹2.50 से ₹3 तक की वृद्धि देखी गई है। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर बढ़ते नियंत्रण और बीमा दरों में हुई बढ़ोतरी के कारण भारत के लिए कच्चे तेल का आयात महंगा हो गया है, जिसके चलते तेल कंपनियों को घरेलू स्तर पर कीमतें बढ़ाने का फैसला लेना पड़ा है।
पेट्रोल और डीजल के दामों में हुई इस वृद्धि का सीधा असर अब रोजमर्रा की आवश्यक वस्तुओं की कीमतों पर पड़ने की आशंका है। ट्रांसपोर्ट यूनियनों ने चेतावनी दी है कि यदि ईंधन के दाम इसी तरह बढ़ते रहे, तो वे माल ढुलाई के किराए (Freight Charges) में 10 से 15 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी करने को मजबूर होंगे। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले दिनों में फल, सब्जियां, दूध और राशन जैसी आवश्यक वस्तुएं और अधिक महंगी हो सकती हैं। मध्यम वर्ग और नौकरीपेशा लोग, जो पहले से ही सीएनजी और एलपीजी की बढ़ती कीमतों से परेशान थे, अब पेट्रोल-डीजल के इस नए झटके से अपने मासिक बजट को संतुलित करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।











