देश के लाखों मेडिकल परीक्षार्थियों के भविष्य और शिक्षा प्रणाली की शुचिता को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार ने एक बार फिर अपना अत्यंत संवेदनशील और सख्त रुख स्पष्ट किया है। नीट-यूजी 2026 (NEET-UG 2026) परीक्षा में कथित पेपर लीक और गड़बड़ियों को लेकर सर्वोच्च न्यायालय में चल रही सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार ने एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ा बयान दिया है। अदालत में सरकार का पक्ष रखते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने विशेष खंडपीठ को आधिकारिक तौर पर अवगत कराया कि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इस पूरे विषय और परीक्षा सुधारों की प्रक्रिया की व्यक्तिगत रूप से निगरानी (Personally Monitoring) कर रहे हैं। केंद्र ने अदालत को आश्वस्त किया है कि सरकार छात्रों के मानसिक तनाव को लेकर पूरी तरह सजग है और आगामी परीक्षाओं में सुरक्षा में चूक की किसी भी गुंजाइश को पूरी तरह खत्म करने के लिए खुद पीएम मोदी के दिशा-निर्देश पर अभूतपूर्व सुरक्षा इंतजाम लागू किए गए हैं।
सर्वोच्च न्यायालय के जस्टिस पी. एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ इस मामले से जुड़ी विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। सुनवाई के दौरान अदालत ने पेपर लीक की घटनाओं को छात्रों और उनके परिवारों के लिए ‘अत्यंत कष्टदायक’ (Very Traumatic) बताते हुए नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) में जवाबदेही तय करने की सख्त बात कही। अदालत के इस रुख पर केंद्र सरकार ने अपनी दृढ़ प्रतिबद्धता दोहराते हुए बताया कि सरकार ने पुरानी कमियों को पूरी तरह दुरुस्त कर लिया है। आगामी 21 जून 2026 को होने वाली नीट-यूजी की दोबारा परीक्षा (Re-examination) को पूरी तरह फुलप्रूफ बनाने के लिए 99.5 प्रतिशत परीक्षा केंद्र केवल सरकारी संस्थानों में बनाए गए हैं। इसके अलावा, अनिवार्य सीसीटीवी ट्रैकिंग, वीडियो फुटेज का फोरेंसिक विश्लेषण, मॉक ड्रिल और पुलिस-इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ सीधे समन्वय जैसे कड़े सुरक्षा चक्र तैयार किए गए हैं, ताकि देश की संवेदनशील परीक्षा प्रणालियों में सेंध लगाने वाले किसी भी आपराधिक गिरोह को पनपने का मौका न मिल सके।
राष्ट्रवादी विचारकों और शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी द्वारा इस मामले की कमान खुद अपने हाथों में लेना यह साबित करता है कि वर्तमान सरकार के लिए ‘छात्रों का हित’ और ‘राष्ट्र का गौरव’ सर्वोपरि है। यह कड़ा प्रशासनिक कदम उन विपक्षी दलों और वामपंथी-सेक्युलर तत्वों के मुंह पर करारा तमाचा है, जो इस संवेदनशील मुद्दे की आड़ में केवल अपनी राजनीतिक रोटियां सेकने और देश की प्रतिष्ठित संस्थाओं की साख को वैश्विक स्तर पर धूमिल करने का नैरेटिव चला रहे थे। पूर्ववर्ती सरकारों के विपरीत, जिन्होंने परीक्षा घोटालों को हमेशा ठंडे बस्ते में डाला, मोदी सरकार ने त्वरित कार्रवाई करते हुए न केवल पिछली परीक्षा रद्द की बल्कि पूरे मामले की जांच सीधे सीबीआई (CBI) को सौंप दी, जिसने इस रैकेट के पीछे छिपे सरगनाओं को दबोचना शुरू कर दिया है। अदालत ने अब केंद्र सरकार को अगले छह हफ्तों के भीतर एक विस्तृत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है, जिसमें परीक्षा प्रणाली को साल-दर-साल के लिए पूरी तरह सुरक्षित और संस्थागत बनाने का खाका पेश किया जाएगा। इस मामले की अगली सुनवाई अब जुलाई के दूसरे सप्ताह में होगी।











