पीओके में पाक सेना की बर्बरता के खिलाफ लंदन में जोरदार प्रदर्शन, उठी आजादी की गूंज!

लंदन/इस्लामाबाद: पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले कश्मीर (PoK) और गिलगित-बाल्टिस्तान में वहां के स्थानीय नागरिकों पर पाकिस्तानी सेना द्वारा ढाए जा रहे जुल्मों, मानवाधिकारों के खुले उल्लंघन और बर्बरता के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान का चेहरा एक बार फिर कड़ाई से बेनकाब हो गया है। ब्रिटेन की राजधानी लंदन में संसद भवन (हाउस ऑफ कॉमन्स) के बाहर कश्मीरी कार्यकर्ताओं, मानवाधिकार संगठनों और प्रवासी सिंडिकेट्स ने मिलकर पाकिस्तानी हुकूमत और उसकी फौज के खिलाफ एक बेहद आक्रामक और जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रदर्शनकारियों ने हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर पाकिस्तानी सेना की क्रूरता को तुरंत रोकने और पीओके को पाकिस्तान के अवैध चंगुल से कड़ाई से आजाद करने के कड़क नारे लगाए।

लंदन की सड़कों पर हुए इस हाई-प्रोफाइल महा-प्रदर्शन के दौरान कश्मीरी नेताओं ने वैश्विक समुदाय और संयुक्त राष्ट्र (UN) से पाकिस्तान के खिलाफ कड़े आर्थिक और राजनयिक प्रतिबंध लगाने की पुरजोर मांग की है। प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि पाकिस्तानी सेना और आईएसआईएस (ISI) का सिंडिकेट पीओके के प्राकृतिक संसाधनों को कड़ाई से लूट रहा है, और जब वहां की भूखी-प्यासी जनता आटे, बिजली और बुनियादी हक के लिए आवाज उठाती है, तो निर्दोष नागरिकों, महिलाओं और शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को जेलों में ठूंसकर उन पर अंधाधुंध गोलियां और लाठियां बरसाई जाती हैं। इस कड़क अंतरराष्ट्रीय विरोध प्रदर्शन के बाद लंदन स्थित पाकिस्तानी उच्चायोग के बाहर सुरक्षा बढ़ा दी गई है और पाक हुकूमत के खेमे में भयंकर छटपटाहट देखी जा रही है।

लंदन की धरती पर गूंजी यह कड़क आवाज उन वामपंथी टूलकिट सिंडिकेट्स और मानवाधिकारों के तथाकथित फर्जी ठेकेदारों के मुंह पर सबसे करारा तमाचा है, जो भारत के जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास को देखकर तो झूठा प्रोपेगैंडा फैलाते हैं, लेकिन पीओके में पाक फौज के असली नरसंहार पर कड़ाई से मुंह बंद रखते हैं। ‘नेशन फर्स्ट’ (Nation First) के संकल्प और अखंड भारत के विजन के साथ आगे बढ़ रहे नए भारत के रुख को इस वैश्विक प्रदर्शन से कड़क मजबूती मिली है। अंतरराष्ट्रीय पटल पर उठे इस कड़े जन-आक्रोश ने साफ कर दिया है कि पाकिस्तान की आतंकी और दमनकारी ‘बेंच स्ट्रेंथ’ अब पूरी दुनिया के सामने पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी है और पीओके की जनता अब अपनी आजादी के लिए अंतिम लड़ाई के मूड में आ चुकी है।

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